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Success Story: सरकारी नौकरी की आस में 34 बार फेल, पर नहीं टूटी हिम्मत, 7 साल बाद UPSC निकालकर अफसर बने अजय

Success Story: सरकारी नौकरी की आस में 34 बार फेल, पर नहीं टूटी हिम्मत, 7 साल बाद UPSC निकालकर अफसर बने अजय

Ajay Pratap Singh UPSC Success Story in Hindi: कहते हैं कि जिद अगर कुछ बड़ा करने की है तो समय भले ही लेकिन सफलता मिल ही जाती है। मिडिल क्लास फैमिली से आने वाले अजय प्रताप की कहानी सिखाती है कि बार-बार असफलताएं तोड़ती नहीं, बल्कि निखारती हैं।

सरकारी नौकरी आस में वह 34 बार फेल हुए लेकिन डटे रहे। अपने लक्ष्य को साधते हुए आगे बढ़े और इतने फेलियर के बाद भी हिम्मत नहीं टूटने दी।

हर निराशा ने उन्हें सीख दी और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी किया। यही वजह थी 7 साल तक उन्होंने खुद को तैयारी में लगाए रखा और फिर एक दिन उनका खूबसूरत सपना पूरा हुआ। आइए इस सक्सेस स्टोरी में जानते हैं कि इतनी बार फेल होने के बाद उन्होंने UPSC कैसे क्रैक किया और अफसर बने।

मेकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई, UPSC का सपना

अजय प्रताप सिंह उत्तर प्रदेश के आगरा के रहने वाले हैं। वह जोशटाॅक के वीडियो के माध्यम से अपनी संघर्ष से सफलता की जर्नी साझा करते हुए बताते हैं कि उन्होंने सरकारी नौकरी की आस में कई फेलियर देखे। 2018 में अपनी मेकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब उनके साथी बेहतर प्राइवेट सैलरी पैकेज और करियर की ओर बढ़ रहे थे तो उन्होंने IAS बनने का सपना देखा।

उन्होंने काॅलेज प्लेसमेंट ठुकराकर दिल्ली का रुख किया, जिससे वह अपनी तैयारी कर सकें और आगे सफलता पाकर देश की प्रतिष्ठित सेवा में शामिल हो सकें।

सरकारी नौकरी पाने के लिए 34 बार फेल हुए लेकिन हिम्मत नहीं हारे

अजय का सरकारी नौकरी की तैयारी का सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने असफलताओं का लंबा सिलसिला देखा। UPSC, UPPSC, MPPSC और अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं सहित वह 34 बार फेल हुए। एक समय ऐसा भी आया जब वह उत्तर प्रदेश (SI) के फिजिकल में केवल 1.5 सेंटीमीटर हाइट कम होने के कारण बाहर हो गए थे। ये असफलताएं किसी को तोड़ने के लिए काफी थीं लेकिन अजय ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी गलतियों से सीखा और अपनी स्ट्रैटेजी में बदलाव किया।

दिल्ली से सिविल सेवा की तैयारी की शुरुआत

अजय ने सिविल सेवा की तैयारी का तरीका अलग रखा। उन्होंने सभी परीक्षाओं की क्रोनोलाॅजिकल लिस्ट बनाई और UPSC के साथ अन्य सरकारी परीक्षाओं पर ध्यान दिया। दिल्ली में रहकर उन्होंने लगातार अपना मूल्यांकन किया, आंसर राइंटिंग और टाइम मैनेजमेंट पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया।

सरकारी नौकरी की उम्मीद और पिता के शब्दों ने भर दी ऊर्जा

इस कठिन दौर में उनके परिवार योगदान बहुत महत्वपूर्ण रहा। अजय ने बताया कि उनकी मां एक सरकारी अस्पताल में नर्स हैं और उन्हें एक बार प्रशासनिक कार्यों में आई समस्याओं के कारण रोते हुए देखकर उन्होंने ठान लिया था कि वह एक दिन अफसर जरूर बनेंगे।

उनकी जिंदगी में सबसे भावुक मोड़ तब आया जब वह CAPF असिस्टेंट कमांडेंट के फिजिकल में एक 'फ्रैक्शन ऑफ सेकंड' (रस्सी चढ़ने में) से चूक गए थे। उस निराशा भरे पल में उनके पिता ने उनसे कहा कि बेटा, मुझे पूरा भरोसा है कि तू आज नहीं तो कल ये एग्जाम जरूर निकालेगा लेकिन वो दिन तेरा आज नहीं है। पिता के इन शब्दों ने अजय को नई ऊर्जा दी और वह अपने लक्ष्य के लिए आगे बढ़ते रहे।

35वें प्रयास में UPSC सफलता, अफसर बनकर बदली जिंदगी

अजय ने हिम्मत नहीं हारी और 1 साल बाद फिर से उसी CAPF असिस्टेंट कमांडेट की परीक्षा फिजिकल में हिस्सा लिया। इस बार उन्होंने अपने डर को पीछे छोड़कर बेहतरीन प्रदर्शन किया और फिनिश लाइन को पार किया। इस बार अपनी मेहनत और 34 बार हारने के बाद अटूट विश्वास के दम उन्होंने सफलता हासिल की। सरकारी नौकरी के 35वें प्रयास में उन्होंने 392 रैंक हासिल करके CAPF असिस्टेंट कमांडेट बनकर 7 साल की तपस्या पूरी की।

अजय प्रताप सिंह के दृढ़ संकल्प की कहानी सिखाती है कि असफलता अंत नहीं है, बल्कि सफलता के रास्ते का एक हिस्सा है। यदि सही दिशा में मेहनत से आगे बढ़ा जाए तो अपनी चमक बिखेरी जा सकती है।
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