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तेजस्वी ने क्यों नहीं पकड़ा मुद्दों का गोल्डन बैटन? यूरोप बसने की फैल रही अफवाह

तेजस्वी ने क्यों नहीं पकड़ा मुद्दों का गोल्डन बैटन? यूरोप बसने की फैल रही अफवाह

टना: बिहार की सियासी गलियारों में इन दिनों राष्ट्रीय जनता दल के युवराज तेजस्वी यादव काफी चर्चे में हैं। सवाल उठाया जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी के लिए ये समय जब खतरों से भरा पड़ा है, वैसे में तेजस्वी यादव कहां रणछोड़ बन गए हैं?

इन दिनों जो उनकी गतिविधियां रही है वो इस बात की वकालत करते दीखती हैं। राजनीतिक गलियारों में ऐसी कितने प्रसंग है, मुद्दे हैं जो तेजस्वी के हाथ जीत का गोल्डन बैटन थाम सकते थे।

मुद्दों के विरुद्ध बैटिंग नहीं


देश की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी का सबसे बुरा दिन चल रहा है। चारों तरफ से बीजेपी घिरते जा रही है। यूजीसी के नए नियम 2026 ने सवर्ण छात्रों को काफी उद्वेलित किया। बीजेपी सरकार पर छात्रों की नाराजगी जमकर बरसी। ऐसे समय में राजद नेता युवराज तेजस्वी यादव को खुल कर छात्रों के साथ खड़ा होना चाहिए। राजनीति में जब ए टू जेड की बात करते हैं तो मुद्दा भी तो ए टू जेड का उठाना होगा। मगर, मौन साधे रहे।

पेपर लीक और नीट प्रसंग


पेपर लीक और नीट प्रसंग जैसे मुद्दे को भी हल्के में लिया। सोशल मीडिया पर भले फुफकारते रहे, पर जमीन पर नहीं उतरे। जंतर मंतर पर दुनिया भर के विरोधी, बच्चों के भविष्य को अंधकार में डालने वाले बीजेपी के विरुद्ध अभिभावक, छात्रों का जमावड़ा मोदी की सरकार के विरुद्ध आग उगल रहे थे तो उस खास समय में पत्नी का बर्थडे मना रहे थे तेजस्वी। जब कॉकरोच पार्टी को समर्थन देने की जरूरत थी तो पूरे सीन से ही गायब रहे।

भरत एनकाउंटर मामला


भरत एनकाउंटर मामले पर भी कड़ा रुख तेजस्वी अपना सकते थे। पर केवल बयान पर ही राजनीति का शामियाना तानते रहे। प्रशांत किशोर उधर भरत तिवारी के परिवार से मिल कर विपक्षी पार्टी का धर्म निभा रहे थे। वे उनके परिवार से वादे कर रहे थे। लेकिन नेता प्रतिपक्ष की हैसियत रखते हुए भी सदन में विरोध तो दूर सदन से ही गायब रहे।

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव


बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के प्रति तेजस्वी यादव ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। बस, औपचारिकता के धागे पकड़ उम्मीदवारी दे दी। लेकिन उम्मीदवारी देने के बाद वे चुनाव लड़ने के लिए सीरियस नहीं रहे। वे भी ऐसे उम्मीदवार के लिए जिसने गत चुनाव में 46 हजार से भी ज्यादा वोट लाई थी। खुद प्रचार करना तो दूर अपने सांसदों तक को चुनाव से दूर कर रखा।

कुछ डील का चक्कर तो नहीं: बागी


वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी का मानना है कि राष्ट्रीय जनता दल के युवराज तेजस्वी यादव का चुनाव से अलगाव चौंकाता तो है। लेकिन राजनीति गलियारों में जो चर्चा है वो कम चौंकाने वाला नहीं। एक चर्चा तो ये है कि तेजस्वी यादव की गृह मंत्री अमित शाह से डील हो गई है। इस डील में यह कहा गया है कि सोशल मीडिया पर बीजेपी के उम्मीदवार का जितना विरोध करना है करें पर जमीन पर विरोध करते वे न दिखे। उससे भी ज्यादा चर्चा राजनीतिक गलियारों में ये है कि तेजस्वी यूरोप में बसना चाह रहे हैं। इसलिए वे बार-बार यूरोप जा रहे हैं। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जो घटनाक्रम दिखा वो इन आरोपों को सपोर्ट करते दिखा। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर उम्मीदवार भी उन्होंने ही तय किया और अपने यूरोप चले गए। विधानसभा का सत्र देखिए, गायब ही रहे। इन सब स्थितियों से लगता है कि राजनीति के प्रति सीरियस नहीं हैं।
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