नई दिल्ली: भारत की कप्तानी कर चुके पूर्व स्टार बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने पिछले हफ्ते क्रिकेट से संन्यास का ऐलान किया। उन्होंने 2023 में भारत के लिे आखिरी टेस्ट खेला था। अपने करियर को अलविदा कहने के बाद पहली बार किसी पॉडकास्ट पर नजर आए रहाणे ने टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया के स्ट्रगल के बारे में अपने पॉइंट्स रखे हैं।
गौतम गंभीर के हेड कोच बनने के बाद से भारत घर में दो टेस्ट सीरीज में क्लीन स्वीप हो चुका है।
अजिंक्य रहाणे भारतीय टेस्ट टीम को करीब से फॉलो कर रहे हैं। उन्होंने स्टीक टू क्रिकेट पॉडकास्ट कहा, 'मैं पिछले दो सालों से टेस्ट क्रिकेट नहीं खेल रहा हूं इसलिए मैं घर पर बैठकर भारतीय टीम को घर में भी मैच हारते हुए देख रहा हूं। मुझे लगता है कि टेस्ट क्रिकेट के लिए मजबूत जज्बे की जरूरत होती है। आपको ऐसे खिलाड़ी तैयार करने होंगे और कॉम्पिटिटिव क्रिकेट खेलना होगा। यही जरूरी है।'
धैर्य की कमी पर जताई चिंता
रहाणे का मानना है कि आज के दौर में कई खिलाड़ी और टीमें मुश्किल परिस्थितियों में धैर्य दिखाने में संघर्ष कर रही हैं। उन्होंने किसी टीम का नाम लिए बिना कहा कि टेस्ट क्रिकेट में लंबे समय तक क्रीज पर टिककर कठिन सत्रों को निकालना एक महत्वपूर्ण कला है, जो अब कम दिखाई देती है।हेड कोच गौतम गंभीर के बारे में रहाणे ने कहा- मैंने उनके (गंभीर) साथ खेला है। जब वह केकेआर के कोच थे, तब मैं टीम में नहीं था। उनके कोच रहते हुए मैंने कभी उनके अंडर नहीं खेला। हमने साथ में तब खेला जब हम इंग्लैंड में आए थे, और भारत में भी।
सीनियर खिलाड़ी टेस्ट में जरूरी
भारतीय टीम के लगभग सभी सीनियर खिलाड़ी रिटायर हो चुके हैं। टीम में ऐसा कोई नहीं है, जिसके पास 100 टेस्ट का अनुभव हो। रविंद्र जडेजा और केएल राहुल का करियर ही 10 साल से ज्यादा का है। रहाणे ने कहा- टेस्ट क्रिकेट के फैन असल में क्रिकेट लवर होते हैं। पिछले दो सालों में जब टेस्ट क्रिकेट में नए खिलाड़ी आए। मुझे अब भी लगता है कि टेस्ट क्रिकेट को 7-8 सीनियर खिलाड़ियों और 2-3 युवा खिलाड़ियों की जरूरत है। अब हम जो देख रहे हैं, वह यह है कि सभी खिलाड़ी असल में नए हैं। शायद ही कोई सीनियर क्रिकेटर बचा हो।
