Trishul And Damru At Home Vastu : सावन के पवित्र महीने में भोलेनाथ की कृपा पाने के लिए घर में त्रिशूल और डमरू रखना बेहद शुभ माना जाता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार, इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, आर्थिक उन्नति होती है और सुख-समृद्धि के संयोग बनते हैं।
तो आइए विस्तार से जानें घर में डमरू और त्रिशूल रखने की सही दिशा, स्थान, नियम और फायदे।
सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। ऐसे में इस दौरान उनसे संबंधित कुछ चीजों को घर लाना बेहद शुभ फलदायक माना जाता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार, भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करने के लिए सावन में त्रिशूल और डमरू घर लाना उत्तम होता है। हालांकि, पूर्ण लाभ के लिए इन्हें सही स्थान और सही दिशा में रखना आवश्यक माना गया है। नियमानुसार त्रिशूल व डमरू घर में रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है, वास्तु दोष का नाश होता है और सुख-समृद्धि के संयोग बनते हैं। ऐसे में आइए वास्तु गुरु मान्या से जानते हैं घर में त्रिशूल और डमरू रखने की दिशा, स्थान, नियम और लाभ विस्तार से।त्रिशूल और डमरू किस दिशा में रखें?

अगर आप सावन के पावन माह में शिवजी का डमरू और त्रिशूल घर लाने की सोच रहे हैं, तो सही दिशा का ख्याल जरूर रखें। वास्तु गुरु मान्या बताती हैं कि त्रिशूल और डमरू को उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण में रखना चाहिए। इस दिशा में को ज्योतिष और वास्तुशास्त्र में बेहद उत्तम व पवित्र माना गया है। यदि ऐसा संभव न हो तो आप पूर्व दिशा में भी डमरू और त्रिशूल रख सकते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
घर में किस स्थान पर रखें त्रिशूल और डमरू?

सही दिशा के साथ-साथ सही स्थान का ख्याल रखना भी आवश्यक है। वास्तुशास्त्र के अनुसार, घर के मंदिर में शिवलिंग या शिवजी की प्रतिमा के पास डमरू और त्रिशूल रखना शुभ होता है। इसके अलावा, आप चाहें तो इनका छोटा या चित्र या यंत्र आप घर के मुख्य द्वार पर ऊपर की तरफ लगा सकते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से नकारात्मकता और बुरी नजर अंदर प्रवेश नहीं करती है।
घर में त्रिशूल और डमरू रखने के नियम

- वास्तु गुरु मान्या कहती हैं कि आप जिस भी स्थान पर त्रिशूल या डमरू रखें वहां की साफ-सफाई और पवित्रता का विशेष ख्याल रखना चाहिए। उस स्थान पर रोज अच्छी तरह साफ-सफाई करें और संभव हो तो गंगाजल का छिड़काव करें। इस बात का ख्याल रखें कि कभी भी गंदगी वाले स्थान पर त्रिशूल और डमरू को नहीं रखना चाहिए।
- पूजा के दौरान त्रिशूल पर तिलक जरूर लगाना चाहिए। इसके बाद, विधि-विधान से पूजा-आरती करें। साथ ही, पूजा के बाद डमरू भी जरूर बजाएं। मान्यता है कि ऐसा करने से आसपास का वातावरण शुद्ध और सकारात्मक होता है।
- त्रिशूल खरीदते समय उसके धातु पर भी जरूर ध्यान देना चाहिए। मान्यता है कि तांबे या चांदी का त्रिशूल सावन में घर लाना शुभ होता है। अपने सामर्थ्य अनुसार आप त्रिशूल छोटा या बड़ा ला सकते हैं। हालांकि, भूलकर भी लोहे का त्रिशूल नहीं खरीदना चाहिए।
त्रिशूल और डमरू घर में रखने के लाभ

वास्तुशास्त्र के अनुसार, घर में त्रिशूल और डमरू सही स्थान व दिशा में रखना बहुत शुभ फलदायक होता है। मान्यता है कि ऐसा करने से बुरी शक्तियों का नाश होता है और तांत्रिक दोष भी दूर हो सकते हैं। साथ ही, वास्तु दोष को दूर करने के लिए भी इन्हें घर में रखना शुभ माना गया है। ऐसा करने से घर में मौजूद ऊर्जा सकारात्मक और संतुलित बनी रहती है। इतना ही नहीं, माना जाता है कि त्रिशूल और डमरू घर में रखने से रुका हुआ धन वापस मिल सकता है और आर्थिक उन्नति के संयोग बनते हैं। घर में डमरू की ध्वनि से घर का वातावरण शांत और तनावमुक्त बना रहता है।

