Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
Why was Sheikh Hasina removed: शेख हसीना की सत्ता से बेदखली से लेकर बांग्लादेश वापसी की सुगबुगाहट तक, जानिए सबकुछ

Why was Sheikh Hasina removed: शेख हसीना की सत्ता से बेदखली से लेकर बांग्लादेश वापसी की सुगबुगाहट तक, जानिए सबकुछ

ढाका: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने देश लौटने का एलान किया है। दो साल से भारत में रह रहीं शेख हसीना ने एक इंटरव्यू में कहा कि वह अपनी पार्टी (अवामी लीग) के नेताओं के साथ साल के आखिर में ढाका लौटेंगी और कोर्ट में आत्मसमर्पण करेंगी।

हसीना के बयान ने दुनिया का ध्यान खींचा है क्योंकि उनकी गैरमौजूदगी में ढाका में उनको मौत की सजा सुनाई जा चुकी है और उनकी पार्टी को बैन कर दिया गया है। एक्सपर्ट मान रहे हैं कि उनकी भारत से निर्वासन खत्म कर वतन वापसी की राह आसान नहीं है।

शेख हसीना ने कहा, 'हो सकता है कि लौटने पर वे मुझे ना सिर्फ गिरफ्तार करें बल्कि मार डालें लेकिन मुझे जाना है। मौत आनी है तो मैं चाहती हूं कि अपनी जमीन पर आए, जहां मेरे माता-पिता दफन हैं। मैं अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को दमन को इस तरह से नहीं देख सकती हूं।' आइए जानते हैं कि शेख हसीना की सरकार क्यों गई, उनको भारत क्यों आना पड़ा और अब उनका भविष्य क्या हो सकता है।

शेख मुजीब की बेटी हैं हसीना

शेख हसीना बांग्लादेश की सबसे प्रमुख राजनीतिज्ञ हस्तियों में से एक हैं। 78 साल की हसीना करीब 20 साल तक अपने देश की प्रधानमंत्री रही हैं। शेख हसीना बांग्लादेश की सबसे प्रमुख पार्टियों में से एक अवामी लीग की प्रमुख हैं। उनको दक्षिण एशिया की प्रमुख और सबसे सफल महिला नेत्रियों में गिना जाता रहा है।

शेख हसीना के परिवार का भी एक खास इतिहास रहा है। वह बांग्लादेश के संस्थापक और पहले राष्ट्रपति शेख मुजीबुर रहमान की बेटी हैं। शेख मुजीब पहले पाकिस्तान और फिर बांग्लादेश की सियायत के अहम चेहरे रहे। उनको पाकिस्तान से बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई लड़ने वाले सबसे प्रमुख लोगों में गिना जाता है।

हसीना ने ढाका क्यों छोड़ा

शेख हसीना के साथ हालिया घटनाक्रम पर बात की जाए तो उनकी पार्टी अवामी लीग को साल 2024 के शुरू में हुए इलेक्शन में भारी जीत मिली थी। हालांकि इस चुनाव का बीएनपी समेत ज्यादातर प्रमुख दलों ने बहिष्कार किया था। ऐसे में हसीना पर चुनाव में धांधली के आरोप लगे और चुनाव के बाद से ही उनकी मुश्किलें बढ़ना शुरू हो गईं। खासतौर से छात्र संगठनों में हसीना सरकार के खिलाफ गुस्सा दिखने लगा।

शेख हसीना की सरकार के नियंत्रण से तब चीजें बाहर हो गईं, जब जुलाई, 2024 में नौकरियों में आरक्षण के मुद्द पर हजारों की संख्या में छात्र सड़कों पर उतर गए। इन प्रदर्शनों ने जल्दी ही हिंसक रूप से लिया। भीड़ पीएम आवास और संसद की ओर बढ़ने लगी तो आनन-फानन में 5 अगस्त 2024 की दोपहर को हसीना एक हेलीकॉप्टर से भारत आ गईं।

यूनुस का अंतरिम शासन

शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ने के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम प्रशासन ने देश की सत्ता संभाली। यूनस के समय में अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ा। देशभर में अवामी लीग के दफ्तरों को फूंका गया और पार्टी नेताओं को जेलों में ठूंस दिया गया।

मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में शेख हसीना, उनके करीबी अधिकारियों और पार्टी के सीनियर नेताओं पर एक के बहाद एअक मुकदमें दर्ज हुए। खासतौर से प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग के मामले में मुकदमें हुए। ढाकी की एक कोर्ट ने नवंबर, 2025 में शेख हसीना को मौत की सजा सुना दी।

शेख हसीना के खिलाफ मुकदमे

शेख हसीना पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने छात्रों के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों को कुचलने के लिए गोली चलाने का आदेश दिया, जिससे एक हजार से ज्यादा मौतें हुईं। इस मामले में हसीना की अनुपस्थिति में सुनवाई हुई और उनको मौत की सजा सुना दी गई। हालांकि शेख हसीना ने इन आरोपों को नकार दिया और सभी इल्जामात को राजनीति से प्रेरित बताया है।

मोहम्मद यूनुस के अंतरिम शासन ने बार-बार भारत से मांग की थी कि शेख हसीना को ढाका को सौंपा जाए क्योंकि उन पर दोष साबित हुआ है और सजा सुनाई जा चुकी है। बीएनपी की मौजूदा सरकार इस मुद्दे पर बहुत आक्रामक नहीं है लेकिन उसने भी हसीना के प्रत्यर्पण को एक मुद्दा माना है। वहीं भारत ने इस मुद्दे पर ज्यादातर मौकों पर खामोशी अख्तियार की है।

तारिक सरकार में बदलेंगी चीजें?

बांग्लादेश में इस साल के शुरू में हुए चुनावों के बाद तारिक रहमान पीएम बने हैं। तारिक दशकों तक हसीना की राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहीं खालिदा जिया के बेटे हैं। हालांकि इस चुनाव में अवामी लीग को हिस्सा लेने से रोक दिया गया था। ऐसे में चुनाव की वैधता पर हसीना ने सवाल खड़े किए और इसके नतीजों को पूरी तरह से नकार दिया। हालांकि अब वह ढाका जाने के संकेत दे रही हैं।

शेख हसीना ने दो साल के बाद ढाका जाने की बात कही है लेकिन उनके लिए वहां चीजें आसान नहीं होगीं। बीते दो साल में बांग्लादेश में दक्षिणपंथी राजनीति उग्र हुई है और भारत विरोधी भावनाओं को भड़काया गया है। जमात-ए-इस्लामी, और एनसीपी जैसे दलों ने हसीना को भारत की तरफदार के तौर पर पेश किया है। एक तरफ ये राजनीतिक मामला है तो दूसरी ओर उन पर दर्ज गंभीर मुकदमे हैं। ऐसे में हसीना ढाका लौट तो जाएंगी लेकिन जेल से बाहर आना उनके लिए आसान नहीं होगा।
Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: navabharat taims