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हरित अधिकरण ने गंगा नदी को प्रदूषित करने को लेकर स्थानीय निकायों को दंडित करने का निर्देश दिया

हरित अधिकरण ने गंगा नदी को प्रदूषित करने को लेकर स्थानीय निकायों को दंडित करने का निर्देश दिया

News Aroma 1 week ago

यी दिल्ली: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (बीएसपीसीबी) को निर्देश दिया है कि वह शहरी स्थानीय निकायों पर गंगा नदी में अशोधित अपशिष्ट प्रवाहित करने के लिए पर्यावरणीय मुआवजा लगाए।

हरित अधिकरण उस मामले की सुनवाई कर रहा है, जिसमें उसने 'नदी प्रदूषण पर बिहार सरकार की रिपोर्ट: गंगा का पानी नहाने के लिए भी असुरक्षित' शीर्षक वाली एक अख़बार की खबर का स्वतः संज्ञान लिया था।

हरित अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने 3 अगस्त को एक आदेश में कहा, ''अधिकरण बिहार के 27 जिलों में गंगा, सोन, कोसी और बागमती समेत कई नदियों में अत्यधिक प्रदूषण और 'फिकल कोलीफ़ॉर्म' जीवाणु की मौजूदगी के मामले की पड़ताल कर रहा है।''

पीठ ने कहा कि जिस खबर के आधार पर यह मूल याचिका दायर की गई थी, उससे ''यह पता चलता है कि बिहार से होकर प्रवाहित होने वाली सभी प्रमुख नदियां नहाने के लिए असुरक्षित हैं।''

इसमें उल्लेख किया गया कि राज्य के पर्यावरण विभाग ने एक हलफनामा दाखिल किया है, जिसके अनुसार बिहार में अभी 43 अपशिष्ट शोधन संयंत्र (एसटीपी) हैं। इनमें से 15 बनकर तैयार और चालू हालत में हैं, पांच का परीक्षण चल रहा है, नौ पर काम जारी है, चार निविदा के चरण में और 10 विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के चरण में हैं।

अधिकरण ने विभाग को निर्देश दिया कि वह इन एसटीपी की क्षमता के इस्तेमाल और निर्माणाधीन संयंत्र की प्रगति के बारे में और जानकारी दे। उसने बीएसपीसीबी से यह बताने को कहा कि क्या इन एसटीपी से निकला शोधित जल तय मानकों को पूरा करता है।

हरित अधिकरण ने उल्लेख किया कि हलफनामे के अनुसार, पटना में 15 ऐसे नाले थे जिनसे रोजाना लगभग 34.9 करोड़ लीटर पानी गंगा नदी में जाता था; बक्सर में सात नालों से 5 करोड़ लीटर, आरा (भोजपुर) में पांच नालों से 4.7 करोड़ लीटर, जमालपुर (मुंगेर) में पांच नालों से 2.5 करोड़ लीटर और बरौनी में दो नालों से 2.3 करोड़ लीटर पानी गंगा नदी में गिरता था।

इसके अलावा, अधिकरण ने पाया कि डुमरांव (बक्सर) में तीन और बड़हिया (लखीसराय) में छह ऐसे नाले हैं जिन पर इस संबंध में अभी तक कोई काम नहीं हुआ ।

अधिकरण ने कहा, ''चूंकि, मल-जल गंगा नदी में प्रवाहित किया जा रहा है, इसलिए बीएसपीसीबी को उन शहरी स्थानीय निकायों पर पर्यावरणीय मुआवजा लगाने की कार्रवाई करनी चाहिए जो नालों के जरिए गंगा नदी में अशोधित अपशिष्ट प्रवाहित करने के लिए जिम्मेदार हैं।''

मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर के लिए निर्धारित की गई है।

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