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सरकारी बंगला खाली करने के बाद बोले लालू, मेरे परिवार के साथ गलत किया गया

सरकारी बंगला खाली करने के बाद बोले लालू, मेरे परिवार के साथ गलत किया गया

News Aroma 1 week ago

Lalu Prasad Yadav : बिहार की राजनीति में चर्चित 10 सर्कुलर रोड सरकारी आवास का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी द्वारा सरकारी बंगला खाली किए जाने के बाद अब राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने पहली बार इस पूरे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

उन्होंने सरकार के फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके परिवार के साथ गलत व्यवहार किया गया है।

दरअसल, बिहार सरकार ने नियमों का हवाला देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने का नोटिस जारी किया था। इस फैसले को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई दिनों तक राजनीतिक बयानबाजी चलती रही। आखिरकार राबड़ी देवी ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवास खाली कर दिया और शुक्रवार शाम इसकी चाबी आधिकारिक रूप से भवन निर्माण विभाग को सौंप दी गई।

सरकारी आवास खाली होने के बाद अब लालू-राबड़ी परिवार पटना के कौटिल्य नगर स्थित नए आवास में रह रहा है। वहीं, परिवार की ओर से महुआबाग इलाके में निजी आवास का निर्माण भी कराया जा रहा है, जहां भविष्य में शिफ्ट होने की तैयारी बताई जा रही है।

इसी बीच शनिवार को मीडिया से बातचीत करते हुए लालू प्रसाद यादव ने सरकार के फैसले पर अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की। उन्होंने कहा, "सरकार के कहने पर हमने बंगला खाली कर दिया। अब सरकार ने फिर से हमें जेड श्रेणी की सुरक्षा भी दे दी है। इससे साफ है कि सरकार खुद अपने फैसलों को लेकर बैकफुट पर है। हमारे साथ बहुत गलत किया गया है।"

लालू यादव के इस बयान के बाद एक बार फिर 10 सर्कुलर रोड आवास का मुद्दा राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है। राजद नेताओं का आरोप है कि सरकार राजनीतिक दुर्भावना के तहत कार्रवाई कर रही है, जबकि सत्तारूढ़ दल का कहना है कि सरकारी संपत्तियों के आवंटन और उपयोग को लेकर सभी नियमों का समान रूप से पालन कराया जा रहा है।

गौरतलब है कि 10 सर्कुलर रोड का सरकारी बंगला वर्षों तक लालू-राबड़ी परिवार का राजनीतिक और प्रशासनिक केंद्र माना जाता रहा है। बिहार की राजनीति से जुड़े कई बड़े फैसलों और बैठकों का यह आवास गवाह रहा है। ऐसे में इसके खाली होने को केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में भी देखा जा रहा है।

फिलहाल, सरकार की ओर से आवास को वापस अपने कब्जे में लेकर आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वहीं, विपक्ष इस पूरे मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी में जुटा है। आने वाले दिनों में यह विवाद बिहार की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

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