लातेहार : झारखंड का प्रसिद्ध हिल स्टेशन नेतरहाट अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए पूरे देश में जाना जाता है। इसे "छोटा नागपुर की रानी" कहा जाता है। हर साल हजारों पर्यटक यहां आते हैं और सरकार भी इसे "पर्यटन हब" बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती है।
लेकिन नेतरहाट पंचायत के ग्रामीणों की हकीकत इन दावों से बिल्कुल उलट है। 2026 में भी यहां के लोग सड़क, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
ग्रामीणों की सबसे बड़ी समस्या सिरसी से नेतरहाट को जोड़ने वाली सड़क है। यह सड़क जगह-जगह से पूरी तरह टूट चुकी है। डामर उखड़ गया है और बड़े-बड़े नुकीले पत्थर बाहर निकल आए हैं। वाहन चलाना तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस रास्ते से गुजरना मतलब अपनी जान जोखिम में डालना है। अब तक कई लोग यहां गिरकर घायल हो चुके हैं। बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। कीचड़ और फिसलन के कारण आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है।
इस टूटी सड़क का सबसे बुरा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है। आपातकाल में 108 एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। अगर किसी को अचानक तबीयत खराब हो जाए, प्रसव पीड़ा हो या कोई दुर्घटना हो जाए तो मरीज को खाट या बाइक पर लादकर 14 किलोमीटर तक इस खतरनाक रास्ते से नेतरहाट मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने के कारण कई बार मरीजों की जान चली जाती है। ग्रामीणों का दर्द है - हम बीमार भी नहीं पड़ सकते।
ग्रामीणों ने बताया कि सबसे दुखद बात यह है कि इस समस्या को लेकर प्रखंड और जिला प्रशासन के अधिकारी कई बार आ चुके हैं। राज्य सरकार के मंत्री और मुख्यमंत्री तक नेतरहाट का दौरा कर विकास का भरोसा दे चुके हैं। लेकिन सिरसी-नेतरहाट सड़क की स्थिति आज भी जस की तस है। ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। उनका आरोप है कि सरकार पर्यटन के नाम पर बड़े-बड़े दावे कर रही है, होटल और पार्क बना रही है, लेकिन गांव के लोगों की बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज कर रही है।
इस बाबत नेतरहाट पंचायत के मुखिया राम बिशुन नागेसिया ने बताया कि पूरे पंचायत क्षेत्र में नेतरहाट राजस्व ग्राम को छोड़कर मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है।उन्होंने जिला प्रशासन से विनम्र आग्रह किया कि त्काल सिरसी-नेतरहाट सड़क का निर्माण और बिजली व्यवस्था बहाल की जाए, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।

