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60 दिनों के बाद तेजस फिर भरेगा उड़ान

60 दिनों के बाद तेजस फिर भरेगा उड़ान

भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान एलसीए तेजस एक बार फिर उड़ान भरने को तैयार है। फरवरी में हुई दुर्घटना के बाद करीब दो महीने तक ग्राउंडेड रहने के बाद अब हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने घोषणा की है कि 8 अप्रैल से तेजस बेड़ा फिर से आसमान में लौटेगा।

हालांकि, लगातार देरी, लागत बढ़ने और हालिया हादसों ने इस परियोजना पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, सवाल है की, क्या दशकों की मेहनत और हजारों करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद यह कार्यक्रम अपेक्षित सफलता हासिल कर पाया है?

पिछले दो वर्षों में तेजस से जुड़े तीन बड़े हादसे सामने आए हैं। फरवरी 2026 में एक विमान की हार्ड लैंडिंग के बाद उसे गंभीर नुकसान हुआ, जबकि 2024 में एक क्रैश इंजन फ्यूल फीड समस्या से जुड़ा था। वहीं नवंबर 2025 में दुबई एयर शो के दौरान दुर्घटना में विंग कमांडर नमांश स्याल की मौत हो गई थी। इन घटनाओं के बाद करीब 34 विमानों का पूरा बेड़ा अस्थायी रूप से ग्राउंड कर दिया गया था।

भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए तेजस का महत्व बेहद अहम है। मिग-21 विमानों की रिटायरमेंट के बाद वायुसेना के स्क्वाड्रन की संख्या घटकर लगभग 30 से कम रह गई है, जबकि स्वीकृत संख्या 42 है। पाकिस्तान और चीन जैसे दोहरे खतरे के बीच तेजस की उपलब्धता रणनीतिक रूप से जरूरी मानी जा रही है।

बता दें की तेजस कार्यक्रम की घोंघे से धीमी गति वायुसेना के लिए सिरदर्द बनते जा रही है। इस गति का बड़ा कारण तेजस विमान की जटिल प्रशासनिक संरचना रही है। इस परियोजना में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) डिजाइन, HAL निर्माण और वायुसेना उपयोगकर्ता के रूप में अलग-अलग भूमिकाओं में रही, लेकिन इनके बीच समन्वय की कमी अक्सर सामने आई। रक्षा विशेषज्ञ संदीप उन्नीथन के मुताबिक, "यह चार अलग-अलग संस्थाओं के बीच बंटी परियोजना थी, जहां समन्वय की कमी के कारण देरी हुई।"

वहीं एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) फिलिप राजकुमार का कहना है कि परियोजना को 1983 से जोड़कर देखना भ्रामक है, क्योंकि वास्तविक विकास कार्य 1993 के बाद शुरू हुआ और 2001 में पहली उड़ान संभव हो पाई।

तेजस कार्यक्रम की एक बड़ी चुनौती स्वदेशी कावेरी इंजन का असफल होना रही। इसके चलते विमान को अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक के इंजन पर निर्भर रहना पड़ा, जिसकी सप्लाई में भी देरी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कावेरी इंजन को समय से अलग करना एक बड़ी रणनीतिक चूक थी, हालांकि इसका कुछ उपयोग अन्य परियोजनाओं में हो रहा है।

आलोचनाओं के बावजूद तेजस कार्यक्रम ने भारत के रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान पाए हुए है। इसने देश में 200-300 कंपनियों का एक एयरोस्पेस इकोसिस्टम तैयार किया है और भारत को लड़ाकू विमान 'डिजाइन' करने की क्षमता प्रदान की है। तकनीकी रूप से तेजस को मिग-21 से बेहतर बताया जाता है। यह आधुनिक मिसाइल, लेजर-गाइडेड बम और उन्नत एवियोनिक्स सिस्टम से लैस है, जिससे यह चौथी पीढ़ी के विमानों के मुकाबले सक्षम माना जाता है।

अब तेजस Mk1A सेवा में आने वाला है, जबकि अधिक उन्नत Mk2 संस्करण पर काम जारी है। कुछ रक्षा विशेषज्ञ बताते है कि भारत के पास इस परियोजना को जारी रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि अत्याधुनिक रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता के लिए यह जरूरी है।

इन असफलताओं के बावजूद HAL के पास 3.25 लाख करोड़ के करीब के ऑर्डर बुक रजिस्टर है। कंपनी में आपसी समन्वय, देरीयां, तमाम असफलता और अकार्यक्षमता के बावजूद विकल्प की कमी के चलते HAL का पोषण हो रहा है, और जवाबदेही कठोरता के साथ नहीं मांगी जा रही।

इसी बीच 60 दिनो बात तेजस की हवाई उडान की खबर ने भारतीय वायुसेना को अपनी मजबूती बरकरार रखने का मौका दिया है।

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