12 नए विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे, 120 अनधिकृत कॉलोनियों और 27 गांवों को मिलेगा लाभ
दिल्ली सरकार ने यमुना नदी में बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए एक बड़ी परियोजना को मंजूरी दी है।
सरकार ने ₹860 करोड़ की लागत से नजफगढ़ नाले के किनारे 12 विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (DSTP) स्थापित करने की योजना शुरू की है। नजफगढ़ नाला यमुना में जाने वाले प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है।
यह परियोजना भाजपा सरकार की उस व्यापक योजना का हिस्सा है जिसके तहत जून 2027 तक दिल्ली की कुल सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता को बढ़ाकर 1,250 MGD (मिलियन गैलन प्रतिदिन) तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार नए DSTP प्लांट कायर, ककरोला, गालिबपुर, जाफरपुर और काजीपुर शिकरपुर सहित कुल 12 स्थानों पर स्थापित किए जाएंगे। इन परियोजनाओं के लिए कार्यादेश भी जारी कर दिए गए हैं।
दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश साहिब सींग ने कहा कि नजफगढ़ क्षेत्र के कई गांवों और कॉलोनियों से अब भी बिना उपचारित सीवेज सीधे नाले में छोड़ा जाता है, जो अंततः यमुना में पहुंचता है। उन्होंने कहा कि यह वर्षों से गंभीर पर्यावरणीय समस्या बनी हुई है और सरकार अब इसका स्थायी समाधान तैयार कर रही है।
सरकार के मुताबिक, नए प्लांट सीवेज को स्रोत के पास ही साफ करेंगे, जिससे नाले और अंततः यमुना में पहुंचने वाले प्रदूषण का स्तर काफी कम होगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे बाहरी दिल्ली की लगभग 120 अनधिकृत कॉलोनियों और 27 गांवों में स्वच्छता व्यवस्था बेहतर होगी।
इसके अलावा मानसून के दौरान जलभराव और बाढ़ जैसी समस्याओं में भी कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है। नजफगढ़ क्षेत्र में हर वर्ष भारी बारिश के दौरान निचले इलाकों में पानी भरने की समस्या सामने आती रही है।
पूरी परियोजना का वित्तपोषण केंद्र सरकार की अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन योजना के तहत किया जाएगा। वर्ष 2015 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में जल आपूर्ति और सीवेज व्यवस्था को मजबूत करना है।
₹860 करोड़ की स्वीकृत लागत में प्लांटों के निर्माण के साथ-साथ अगले 15 वर्षों तक उनके संचालन और रखरखाव का खर्च भी शामिल है। परियोजना को लागू करने वाली कंपनी इसी अवधि तक इन सुविधाओं के रखरखाव की जिम्मेदारी भी संभालेगी।
वर्तमान में दिल्ली जल बोर्ड राजधानी में 27 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट संचालित कर रहा है, जिनमें से 18 का उन्नयन कार्य जारी है। पिछले वर्ष दिल्ली सरकार ने राजधानी भर में 40 विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की मंजूरी भी दी थी।
अधिकारियों के अनुसार दिल्ली की मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता लगभग 600-700 MGD है। नजफगढ़ में बनने वाले 12 नए प्लांट इसमें अतिरिक्त 40 MGD क्षमता जोड़ेंगे।
नजफगढ़ नाले को लेकर बढ़ती चिंता की एक बड़ी वजह इसका विशाल जलग्रहण क्षेत्र भी है। मुगल कमांडर मिर्जा नजफ खान के नाम पर बने इस नाले को साहिबी नदी का अंतिम हिस्सा माना जाता है। लगभग 120 किलोमीटर लंबी यह नदी अरावली पहाड़ियों से निकलती है और दिल्ली से गुजरते हुए यमुना में मिलती है।
करीब 918 वर्ग किलोमीटर के जलग्रहण क्षेत्र वाले इस नाले में लगभग 123 छोटे नालों का गंदा पानी आकर मिलता है। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली का नजफगढ़ क्षेत्र घनी आबादी वाला इलाका है और इसके आसपास लगभग 70 गांव स्थित हैं।
हालिया शहरी ड्रेनेज अध्ययन में नजफगढ़ नाले में प्लास्टिक प्रदूषण का स्तर भी चिंताजनक पाया गया। अध्ययन के अनुसार मानसून से पहले यहां माइक्रोप्लास्टिक का स्तर 5,400 MPs प्रति घन मीटर और मानसून के बाद 2,400 MPs प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। इनमें प्लास्टिक के टुकड़े, फिल्म, फाइबर, पेलेट और फोम जैसे प्रदूषक शामिल थे।
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