आपने लैला मजनू और हीर-रांझा की लव स्टोरी सुनी होगी... लेकिन उत्तराखंड के बागेश्वर में बुजुर्ग रिटायर्ड फौजी केदार सिंह की प्रेम कहानी थोड़ा अलग और अनोखी है। 1962 में जब वे सेना में तैनात थे, तब उन्होंने लक्ष्मी देवी से शादी थी।
2019 में पत्नी के आकस्मिक निधन ने केदार सिंह को भीतर से तोड़ दिया, लेकिन उनका प्रेम आज भी जीवित है। उन्होंने घर में पत्नी की आदमकद प्रतिमा स्थापित की है और दिन-रात दीप जलाकर वो पत्नी की पूजा करते हैं। केदार सिंह की प्रेम कहानी गांवभर में मिसाल है।
कपकोट तहसील के फरसाली वल्ली तिलघर गांव में एक ऐसी प्रेम कहानी सामने आई है, जो लोगों के दिलों को छू रही है। यहां के पूर्व सैनिक केदार सिंह कोश्यारी ने अपनी दिवंगत पत्नी लक्ष्मी देवी की याद में घर में उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित कर सच्चे प्रेम और समर्पण की अनोखी मिसाल पेश की है।
साल 1962 में लक्ष्मी देवी के साथ सात जन्मों तक साथ निभाने का वचन लेने वाले केदार सिंह ने पत्नी के निधन के बाद भी उस वादे को निभाने का संकल्प लिया। वे रोज सुबह-शाम प्रतिमा के सामने दीप जलाकर पूजा करते हैं और अपनी दिनचर्या से जुड़ी बातें भी साझा करते हैं। उनका यह भावनात्मक जुड़ाव क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
इस प्रेम कहानी की शुरुआत 1962 में हुई, जब केदार सिंह भारतीय सेना में तैनात थे और अरुणाचल प्रदेश में देश सेवा कर रहे थे। विवाह के बाद उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर गांव लौटने का फैसला किया और दोनों ने मिलकर जीवन की जिम्मेदारियां निभाईं।
7 दिसंबर 2019 को एक विवाह समारोह के दौरान लक्ष्मी देवी का अचानक निधन हो गया, जिससे केदार सिंह को गहरा आघात लगा। इस दुख को सहते हुए उन्होंने पत्नी की यादों को जीवित रखने का निर्णय लिया और वर्ष 2020 में उनकी आदमकद प्रतिमा बनवाकर घर में स्थापित कर दी।
संतान न होने के कारण केदार सिंह आज अपने भतीजे और बहू के साथ रहते हैं, जो उनकी देखभाल करते हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका अपनी पत्नी के प्रति प्रेम और विश्वास अटूट बना हुआ है। वे आज भी प्रतिमा के सामने बैठकर उनसे बातें करते हैं, मानो लक्ष्मी देवी आज भी उनके साथ हों।
केदार सिंह की यह अनूठी कहानी यह संदेश देती है कि सच्चा प्रेम समय और मृत्यु की सीमाओं से परे होता है-और यही भावना उन्हें लोगों के बीच एक मिसाल बना रही है।

