अक्सर लोग इन छोटी दिखने वाली दिक्कतों को नजरअंदाज कर देते हैं जो बाद में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनती हैं।
पाचन से जुड़ी इन्हीं परेशानियों से बचने के लिए भारतीय घरों में अजवाइन का उपयोग सबसे आम घरेलू नुस्खा है। हालांकि अधिकांश लोग इसके सेवन के सही तरीके और मात्रा से अनजान हैं जिसके कारण उन्हें वांछित लाभ नहीं मिल पाता। आइए जानते हैं कि अजवाइन का सेवन करते समय किन बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है।
अजवाइन में थाइमोल नाम का एक सक्रिय यौगिक पाया जाता है। यह तत्व पाचन रसों के स्राव में मदद करता है जिससे खाना आसानी से पचता है। साथ ही इसकी तासीर गर्म होती है जो न केवल गैस और अपच में राहत देती है बल्कि सर्दी-खांसी जैसे मौसमी संक्रमणों से भी बचाव करती है।
अक्सर लोग अजवाइन के दानों को डिब्बे से निकालकर सीधे कच्चा ही चबा लेते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह तरीका बिल्कुल गलत है। अजवाइन का पूरा लाभ लेने के लिए इसे हल्का भून लेना चाहिए। ध्यान रहे कि इसे बहुत अधिक न भूनें; बस इतना गर्म करें कि इसका रंग न बदले लेकिन इसमें से हल्की-हल्की सुगंध आने लगे। भुनी हुई अजवाइन सुपाच्य होती है और शरीर पर बेहतर प्रभाव डालती है।

अजवाइन (सौ. फ्रीपिक)
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अजवाइन का सेवन हमेशा गुनगुने पानी के साथ करना चाहिए। गुनगुना पानी इसके औषधीय गुणों को सक्रिय कर देता है जिससे पेट की जठराग्नि (पाचन अग्नि) तेज होती है। मात्रा की बात करें तो एक बार में आधे से कम चम्मच अजवाइन पर्याप्त होती है। इसकी अधिक मात्रा पेट में जलन पैदा कर सकती है।
एक बहुत बड़ा भ्रम यह है कि सुबह खाली पेट अजवाइन का पानी या सूखी अजवाइन लेना सेहत के लिए अच्छा है। लेकिन आयुर्वेद और आधुनिक शोध बताते हैं कि अजवाइन को हमेशा भोजन के बाद ही लेना चाहिए। खाना खाने के करीब 30 मिनट बाद गुनगुने पानी से इसका सेवन करने पर यह भोजन को पचाने में सबसे अधिक प्रभावी सिद्ध होती है।
अजवाइन एक औषधि है इसे भोजन का हिस्सा न बनाएं। इसकी तासीर अत्यधिक गर्म होती है इसलिए इसका सेवन केवल तभी करें जब आपको वास्तव में या पेट फूलने की समस्या हो। बिना किसी कारण के नियमित रूप से इसे खाने से पेट में गर्मी और जलन की शिकायत हो सकती है।

