लेकिन, लॉस एंजिल्स की फुट सर्जन डॉ. डाना फिगुरा का कहना है कि इन निशानों के पीछे कुछ मेडिकल कारण हो सकते हैं, जिन्हें समझना जरूरी है। आइए जानें इनके बारे में।
डॉ. डाना फिगुरा के अनुसार, बिना किसी बड़ी चोट के शरीर पर बार-बार नील पड़ना एक सामान्य मेडिकल कंडीशन हो सकती है, जिसे पर्पुरा सिम्पलेक्स (Purpura Simplex) कहा जाता है। यह एक वैस्कुलर ब्लीडिंग डिसऑर्डर है, जो पुरुषों की तुलना में महिलाओं में कहीं ज्यादा देखा जाता है। हालांकि, ज्यादातर मामलों में यह हानिकारक नहीं होता, लेकिन बार-बार बिना वजह नील पड़ना इस ओर इशारा करता है कि आपकी त्वचा के नीचे की ब्लड वेसल्स नाजुक हैं।
हमारी त्वचा के ठीक नीचे बहुत छोटी-छोटी नसें होती हैं जिन्हें कैपिलरीज कहा जाता है। ये कैपिलरीज बहुत नाजुक होती हैं। ये मामूली दबाव या छोटे-मोटे झटके से भी फट जाती हैं, जिन्हें हम याद भी नहीं रख पाते।
इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं-
- हार्मोन में बदलाव- शरीर में होने वाले हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण ब्लड कैपिलरीज प्रभावित होती हैं।
- त्वचा की संरचना- त्वचा की बनावट और मोटाई।
- कोलेजन का अंतर- शरीर में मौजूद कोलेजन, जो ब्लड वेसल्स को सपोर्ट देता है, उसकी कमी या बनावट में अंतर होने से कैपिलरीज आसानी से टूट जाती हैं।
हालांकि, ये नीले निशान अक्सर सामान्य होते हैं, लेकिन फुट सर्जन डॉ. फिगुरा बताती हैं कि इन्हें हमेशा मामूली मानकर नहीं टालना चाहिए। कभी-कभी ये शरीर में किसी गंभीर कमी का संकेत हो सकता है, जैसे- विटामिन की कमी और एनीमिया या आयरन की कमी।
अगर आपको नीले निशानों के साथ-साथ नीचे दिए गए लक्षण भी महसूस हो रहे हैं, तो आपको तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए-
- बहुत ज्यादा थकान महसूस होना।
- मसूड़ों से खून आना या नाक से खून बहना।
- पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होना।

