कई लोग सोचते हैं कि ऐसी स्थिति में नाम जप करना अनुचित हो सकता है.
इसी विषय पर प्रेमानंद महाराज का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया यानी इंस्टाग्राम पर तेजी से वायरल हो रहा है.
वीडियो में एक महिला उनसे सीधा सवाल करती नजर आती है. वह पूछती है कि क्या बिस्तर पर बैठकर या लेटे हुए भगवान का नाम लेना सही होता है या नहीं. इस सवाल पर प्रेमानंद महाराज बेहद शांत सरल शब्दों में जवाब देते हैं. वह कहते हैं कि भगवान का नाम लेने पर कोई रोक नहीं है. व्यक्ति चाहे किसी भी अवस्था में हो, वह ईश्वर का स्मरण कर सकता है. उन्होंने यह भी बताया कि शास्त्रों में नाम जप को पवित्र करने वाला माना गया है.
महाराज एक संस्कृत श्लोक का अर्थ समझाते हुए कहते हैं कि इंसान चाहे शुद्ध हो या अशुद्ध, अगर वह भगवान को याद करता है तो वह भीतर बाहर से पवित्र हो जाता है. उनके अनुसार, नाम स्मरण स्वयं में एक ऐसी शक्ति है जो मन आत्मा को साफ करती है.
हालांकि, प्रेमानंद महाराज ने यह भी स्पष्ट किया कि गुरु मंत्र नाम जप में अंतर होता है. गुरु मंत्र के लिए कुछ विशेष नियम बताए गए हैं. उन्होंने कहा कि जिस बिस्तर पर गृहस्थ जीवन के कार्य होते हैं, वहां बैठकर गुरु मंत्र का जप नहीं करना चाहिए.
इसके अलावा, शौचालय या अपवित्र मानी जाने वाली स्थिति में गुरु मंत्र का जप वर्जित बताया गया है. लेकिन भगवान के नाम का जप इन नियमों से अलग है. इसे किसी भी समय किसी भी स्थान पर किया जा सकता है.
महाराज के अनुसार, नाम जप का मुख्य उद्देश्य मन को शुद्ध करना भगवान से जुड़ाव बढ़ाना है. जब इंसान बार-बार ईश्वर का नाम लेता है, तो उसके विचारों में सकारात्मकता आती है. उसका मन शांत होता है. यही वजह है कि उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वे हर परिस्थिति में भगवान को याद करें. क्योंकि नाम जप न केवल आत्मा को मजबूत करता है, बल्कि इंसान को सही रास्ते पर भी चलने की प्रेरणा देता है.

