आंतों में पहुंचाता है अमोघ रस
सिटी अस्पताल, नई दिल्ली में डायटीशियन डॉ. मुक्ता वशिष्ठ बताती है कि विज्ञान के हिसाब से भी घी सबसे शुद्धतम रूप है लेकिन अगर इसे देसी तरीके यानी आप खुद से घर में मथ कर इसे बनाते है तभी. अगर इसमें कुछ मिलावट हो गया तो यह शुद्ध नहीं पाता. शुद्ध घी शुद्ध सैचुरेटेड फैट होता है. इसमें ब्यूटैरिक एसिड और ओलिक एसिड होता है. अगर इसे सीमित मात्रा में खाया जाए तो यह दोनों चीजें हमारी सेहत के लिए अमोघ रस है. इसमें जो ब्यूटैरिक एसिड है आंतों को इतना सुकून पहुंचाता है कि आप कल्पना भी नहीं कर सकते है. यह आंतों में जितनी भी तरह की परेशानियां है लगभग सबको दूर कर सकता है. इससे गुड बैक्टीरिया की संख्या बढ़ती है. आंतों की लाइनिंग में इंफ्लामेशन नहीं होता. इससे पेट संबंधी परेशानी यानी गैस, एसिडिटी, ब्लोटिंग, इरीटेबल बाओल सिंड्रोम आदि से राहत मिल जाती है.
हार्ट के लिए अमृत
अगर घी का सीमित मात्रा में सेवन किया जाए तो यह हार्ट के लिए अमृत समान काम करेगा. घी में कंजुगेटेड लिनोलिक एसिड सीएलए होता है. यह बैड कोलोस्ट्रॉल के लिए दुश्मन है. यह जहां भी एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को जमा हुआ पाता है वहां से इसे दरबदर कर देता है. दूसरी ओर यह अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा देता है जिससे अपने आप गंदे कोलेस्ट्रॉल का खात्मा हो जाता है. दूसरी तरफ घी ब्लड सर्कुलेशन को भी बढ़ा देता है. इससे सेल डैमेज का खतरा कम हो जाता है. इस तरह यह हार्ट से संबंधित जटिलताओं को कम कर बीमारियों के जोखिम को कम करता है.
एक दिन में कितना खाना चाहिए
चूंकि घी में कैलोरी बहुत होती है इसलिए यदि आप चीनी वाली चीजें या हाई कार्ब डाइट के साथ खाएंगे तो इससे वजन बढ़ जाएगा. एक दिन में कितना घी खाना चाहिए यह आपके मेटाबोलिज्म, लाइफस्टाइल और खान-पान पर निर्भर करता है. आमतौर पर किसी भी परिस्थिति में पूरे दिन में 1 से 2 चम्मच घी ही खाना चाहिए. आदर्श रूप से एक चम्मच घी रोज खाना चाहिए लेकिन घी को यदि आप ज्यादा गर्म कर खाएंगे तो इसका कोई फायदा नहीं होगा उल्टा नुकसान होगा. इसलिए घी को हल्का गर्म करें. जब आधा गले तभी इसे रोटी या चावल में मिला दें. अगर गर्म रोटी पर सॉलिड घी रख देंगे तब भी यह पिघल जाएगा.

