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द्रौपदी का वो भयंकर श्राप, जो' बना घटोत्कच की मौत की वजह'

द्रौपदी का वो भयंकर श्राप, जो' बना घटोत्कच की मौत की वजह'

ज पांच हजार साल बाद भी लोगों के बीच महाभारत की कथा देखी और सुनाई जाती है. महाभारत का युद्ध कौरवों और पांडवों के बीच नहीं, बल्कि धर्म-अधर्म के बीच हुआ था.

महाभारत की कथा में अनेकों किरदार और उनकी कहानियां शामिल हैं.

महाभारत युद्ध में एक ऐसा ही किरदार थे घटोत्कच.

घटोत्कच पांडु पुत्र भीम और हिडिम्बा के पुत्र के पुत्र थे. महाभारत के युद्ध में उन्होंने कौरव सेना को बहुत नुकसान पहुंचाया था. तब दुर्योधन के कहने पर कर्ण ने देवराज इंद्र का 'अमोघ शक्ति' अस्त्र चलाकर घटोत्कच का वध किया था, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक श्राप घटोत्कच की मृत्यु की वजह बना था? आइए विस्तार से जानते हैं ये कहानी.

महाभारत की कथा के अनुसार, भीम और हिडिम्बा के पुत्र घटोत्कच ने पहली बार पांडवों के महल में आने पर अपनी माता के आदेश का पालन करते हुए और सभी पांडवों को तो प्रणाम किया, लेकिन वो द्रौपदी को सम्मान देना भूल गए. उन्होंने द्रौपदी को एक साधारण नारी समझा और उनकी उपेक्षा कर दी. इसका परिणाम बहुत भयावह रहा.

स्कंद पुराण के प्रभास खंड के अनुसार, द्रौपदी पांचाल नरेश की पुत्री और पांडवों की पत्नी थीं. वो घटोत्कच के इस व्यवहार से अत्यंत अपमानित महसूस करने लगीं. उनको लगा कि घटोत्कच एक राक्षसी पुत्र है. इसलिए उनको बड़ों और कुल की मर्यादाओं का सम्मान करना नहीं आता.

इसके बाद क्रोध में आकर उन्होंने घटोत्कच से कहा कि तुमने एक महारानी को अपमानित किया है और घंमड में अपनी मर्यादा भूले हो, इसलिए जाओ तुम्हारी आयु कम होगी और तुम बिना किसी युद्ध के अंत के, अकाल मृत्यु को प्राप्त हो जाओगे. जब भीम को इस श्राप के बारे में ज्ञात हुआ तो उन्होंने द्रौपदी से क्षमा मांगी.

इसके बाद द्रौपदी का क्रोध शांत हुआ, लेकिन जो श्राप दिया जा चुका था, उसे वापस नहीं लिया जा सकता था. हालांकि, बाद में ये श्राप श्रीकृष्ण की लीला से जोड़ दिया गया. क्योंकि अर्जुन के प्राण बचाने और धर्म को स्थापित करने के लिए कर्ण द्वारा घटोत्कच का वध बहुत आवश्यक था.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. Nh भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: News Himachali Hindi