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एक मौका और देती हूं; केजरीवाल के बहिष्कार के बीच जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने क्या कहा?

एक मौका और देती हूं; केजरीवाल के बहिष्कार के बीच जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने क्या कहा?

नीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक की ओर से जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत का बहिष्कार किए जाने के बीच बुधवार को कथित शराब घोटाले केस की सुनवाई हुई। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का रिकॉर्ड और कुछ प्रतिवादियों की ओर से जवाब नहीं मिलने की वजह से सुनवाई सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी।

अदालत ने जवाब दाखिल करने का एक और मौका देते हुए कहा कि अगली सुनवाई सोमवार को 2.30 बजे होगी।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, एएसजी एसवी राजू और एएसजी डीपी सिंह अदालत में मौजूद रहे। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने कहा कि उन्हें ट्रायल कोर्ट का पूरा रिकॉर्ड हासिल नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, 'विशेष संदेशवाहक के जरिए ट्रायल कोर्ट का पूरा रिकॉर्ड पेश किया जाए।' अदालत ने कहा कि पूरा रिकॉर्ड नहीं मिलने की वजह से गुरुवार की सुनवाई रद्द कर दी गई है। अदालत ने इस बात का भी जिक्र किया कि कुछ प्रतिवादियों ने अभी तक जवाब दाखिल नहीं किया है।

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने कहा कि जिन लोगों ने शनिवार तक अपना जवाब दाखिल नहीं किया है उन्हें एक और मौका दिया जाए। उन्होंने कहा कि शनिवार तक यह कर लिया जाए और सोमवार को अगली सुनवाई होगी। उन्होंने कहा, 'हम ट्रायल कोर्ट का रिकॉर्ड मंगाएंगे और सोमवार को सुनवाई की शुरुआत होगी।' एक प्रतिवादी की ओर से पेश हुए अधिवक्ता फर्रुख खान ने कहा कि उन्होंने स्थगन आदेश को रद्द करने के लिए आवेदन दायर किया है। इस पर एसजी ने कहा कि वह जवाब दाखिल करेंगे।

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल को ईडी की उन याचिकाओं पर नया नोटिस जारी किया, जिनमें आबकारी नीति मामले में समन जारी होने के बावजूद जांच एजेंसी के सामने पेश न होने के लिए उनके खिलाफ दर्ज दो अलग-अलग मामलों में उन्हें बरी किए जाने को चुनौती दी गई है।

दिल्ली हाई कोर्ट में शराब घोटाले केस की सुनवाई ऐसे समय पर हुई है जब अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक जस्टिस शर्मा के बहिष्कार का ऐलान कर चुके हैं। जज पर पक्षपात की संभावना के आरोप लगाकर तीनों नेताओं ने कहा है कि उनका कोई वकील भी पेश नहीं होगा। जस्टिस शर्मा की ओर से केजरीवाल और अन्य की रिक्यूजल याचिका खारिज किए जाने के बाद यह कदम उठाया गया है, जिसे सत्याग्रह का नाम दिया जा रहा है।

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