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घाट से गंगाजल' ले आया शख्स, माइक्रोस्कोप से देखते ही उड़े होश दिखी ऐसी-ऐसी चीजें...

घाट से गंगाजल' ले आया शख्स, माइक्रोस्कोप से देखते ही उड़े होश दिखी ऐसी-ऐसी चीजें...

गंगा को मां मानकर करोड़ों लोग इसमें डुबकी लगाते हैं. भारत में शायद ही कोई हिन्दू होगा, जो पूजापाठ में गंगाजल का इस्तेमाल नहीं करता. किसी भी चीज को शुद्ध करना हो तो उसके लिए गंगाजल का इस्तेमाल किया जाता है.

लेकिन एक ब्रिटिश बॉयोलॉजिस्ट के वीडियो ने इस पवित्र नदी की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं. जिस गंगाजल से हम हर चीज शुद्ध करते हैं, आज की डेट में उसी की शुद्धता पर सवाल खड़ा हो गया है. वायरल हो रहे वीडियो ने इस विवाद को पैदा किया है. क्या है पूरा मामला?

किया केमिकल टेस्ट
जेरेमी वेड, जो River Monsters शो के लिए मशहूर हैं, ने गंगाजल का सिंपल केमिकल टेस्ट किया, जिसके रिजल्ट देखकर लोग स्तब्ध रह गए. वीडियो में वेड ने गंगाजल की मिनरल वॉटर से तुलना की. ये केमिकल साफ़ पानी को गुलाबी करता है जबकि दूषित पानी भूरे रंग का हो जाता है. जब टेस्ट किया गया तो गंगा का सैंपल हल्का भूरा हो गया, जिसका मतलब था कि उसमें फेकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया मौजूद है. वेड ने स्पष्ट कहा, "यह ह्यूमन वेस्ट से दूषित है." यह टेस्ट बैक्टीरिया इंडिकेटर है, जो सीवेज या मानव मल से आने वाले बैक्टीरिया की मौजूदगी दिखाता है. फेकल कोलीफॉर्म (जैसे E. coli) पानी में होने पर टाइफाइड, हेपेटाइटिस A, गैस्ट्रोएंटेराइटिस जैसी बीमारियां फैला सकता है.

तो अब सेफ नहीं गंगाजल
वीडियो में वेड ने कहा कि गंगा में नहाने या पीने से डिसेंट्री या इससे बदतर हो सकता है. CPCB रिपोर्ट्स से पता चलता है कि प्रयागराज में महाकुंभ 2025 के दौरान फेकल कोलीफॉर्म लेवल 2,500 MPN/100ml की सुरक्षित सीमा से कई गुना ज्यादा था. कुछ जगहों पर 11,000 तक पहुंच गया था. वेदर और भीड़ से प्रदूषण बढ़ता है. वेड ने धार्मिक संवेदनशीलता का सम्मान किया. उन्होंने कहा कि गंगा को प्रदूषित बताना कई हिंदुओं के लिए अपमानजनक लग सकता है. गंगा प्रदूषण की समस्या पुरानी है. सीवेज, इंडस्ट्री वेस्ट, प्लास्टिक और धार्मिक एक्टिविटीज से नदी दूषित होती है. नमामि गंगे प्रोजेक्ट में करोड़ों खर्च हुए, लेकिन कई जगहों पर फेकल कोलीफॉर्म हाई है. वराणसी, कानपुर जैसे शहरों में सबसे ज्यादा प्रदूषण है.

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