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हाथ-पैर सुन्न होना: कहीं यह शरीर का आख़िरी चेतावनी संकेत तो नहीं'

हाथ-पैर सुन्न होना: कहीं यह शरीर का आख़िरी चेतावनी संकेत तो नहीं'

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हाथ-पैर सुन्न होना एक आम समस्या बनती जा रही है। अक्सर लोग इसे थकान, गलत तरीके से बैठने या सोने का नतीजा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हर बार हाथ-पैर सुन्न होना सामान्य नहीं होता।
कई बार यह नसों से जुड़ी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है।

मोबाइल, लैपटॉप और घंटों कुर्सी पर बैठे रहने की आदत ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि हाथ-पैर सुन्न होना कब सामान्य है और कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी हो जाता है।

हाथ-पैर सुन्न होना दरअसल नसों तक सही तरीके से रक्त या सिग्नल न पहुंच पाने की स्थिति है। जब किसी नस पर दबाव पड़ता है या नर्व डैमेज होता है, तो दिमाग और शरीर के अंगों के बीच संदेश सही तरह से नहीं पहुंच पाते। इसका नतीजा झनझनाहट, सुन्नपन या जलन के रूप में सामने आता है।

दिल्ली एमसीडी से जुड़े वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अजय कुमार बताते हैं कि अगर हाथ-पैर सुन्न होना कुछ मिनटों के लिए हो और पोजीशन बदलते ही ठीक हो जाए, तो इसे सामान्य माना जाता है।

  • लंबे समय तक एक ही पोजीशन में बैठना
  • पैर पर पैर चढ़ाकर बैठना
  • हाथ के नीचे दबकर सो जाना
  • लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप इस्तेमाल करना

ऐसे मामलों में नसों पर अस्थायी दबाव पड़ता है, जिससे थोड़ी देर के लिए झनझनाहट या सुन्नपन महसूस होता है।

अगर हाथ-पैर सुन्न होना बार-बार हो, लंबे समय तक बना रहे या बिना किसी स्पष्ट कारण के होने लगे, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।

  • सुन्नपन के साथ दर्द या जलन
  • हाथ या पैर में कमजोरी
  • चलते समय डगमगाहट
  • संतुलन बनाने में परेशानी
  • रात में ज्यादा झनझनाहट

ये लक्षण नसों की गंभीर समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं।

डायबिटीज के मरीजों में हाथ-पैर सुन्न होना एक आम लेकिन खतरनाक समस्या है। लंबे समय तक ब्लड शुगर कंट्रोल न रहने से नसें कमजोर हो जाती हैं, जिसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है।

विटामिन B12 नसों के लिए बेहद जरूरी होता है। इसकी कमी से हाथ-पैर सुन्न होना, झनझनाहट और कमजोरी हो सकती है। शाकाहारी लोगों में यह कमी ज्यादा देखी जाती है।

रीढ़ की हड्डी में नस दबने से भी हाथ-पैर सुन्न होना महसूस हो सकता है। सर्वाइकल या स्लिप डिस्क के मरीजों में यह समस्या आम है।

अगर शरीर के किसी हिस्से तक खून सही मात्रा में नहीं पहुंच पाता, तो भी सुन्नपन हो सकता है। यह स्थिति हृदय रोग या नसों की ब्लॉकेज से जुड़ी हो सकती है।

लगातार तनाव और एंग्जायटी भी नसों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे मामलों में हाथ-पैर सुन्न होना मानसिक कारणों से भी हो सकता है।

अगर अचानक शरीर के एक तरफ हाथ-पैर सुन्न होना, बोलने में दिक्कत, चेहरे का टेढ़ा होना या चलने में परेशानी हो, तो यह स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में एक मिनट भी गंवाना खतरनाक हो सकता है।

डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार कुछ जांच की सलाह देते हैं:

  • ब्लड शुगर टेस्ट
  • विटामिन B12 लेवल
  • थायरॉयड टेस्ट
  • MRI या CT स्कैन
  • नर्व कंडक्शन टेस्ट

इन जांचों से हाथ-पैर सुन्न होना के असली कारण का पता लगाया जा सकता है।

अगर हाथ-पैर सुन्न होना कभी-कभार होता है, तो कुछ आसान उपाय मदद कर सकते हैं।

  • लंबे समय तक एक ही पोजीशन में न बैठें
  • हर घंटे हल्की स्ट्रेचिंग करें
  • मोबाइल और लैपटॉप का सीमित उपयोग करें
  • संतुलित आहार लें
  • विटामिन B12 युक्त भोजन शामिल करें
  • नियमित व्यायाम करें

अगर हाथ-पैर सुन्न होना बार-बार हो, लंबे समय तक बना रहे या इसके साथ कमजोरी, दर्द या चलने में दिक्कत हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज से नसों को होने वाले स्थायी नुकसान से बचा जा सकता है।

हाथ-पैर सुन्न होना हमेशा मामूली समस्या नहीं होती। कभी यह केवल गलत पोजीशन का नतीजा होता है, तो कभी गंभीर बीमारी की चेतावनी। शरीर के संकेतों को समझना और समय पर जांच कराना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है। थोड़ी सी जागरूकता आपको बड़ी परेशानी से बचा सकती है।

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