पश्चिम एशिया इस समय गंभीर तनाव के दौर से गुजर रहा है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति बन गई। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने भी हमले किए और इसके बाद से लगातार संघर्ष जारी है।
इस टकराव में हजारों लोगों की जान जा चुकी है और वैश्विक राजनीति में भी इसका असर दिखाई दे रहा है।
इसी बीच खबर सामने आई है कि अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थों का एक समूह 45 दिनों के प्रस्तावित संघर्ष-विराम पर बातचीत कर रहा है। माना जा रहा है कि यदि यह समझौता सफल होता है तो पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी हिंसा को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है।
लेकिन इस राजनीतिक और सैन्य तनाव के बीच एक सामाजिक मुद्दा भी चर्चा में आ गया है-ईरान में मातृत्व की उम्र। दरअसल, ईरान में विवाह की कानूनी उम्र काफी कम है, लेकिन इसके बावजूद महिलाएं अपेक्षाकृत देर से मां बनती हैं। यह विरोधाभास वैश्विक स्तर पर शोधकर्ताओं और समाजशास्त्रियों के लिए दिलचस्प विषय बन गया है।
ईरान के सिविल कोड (Civil Code) के अनुच्छेद 1041 के अनुसार लड़कियों के विवाह की न्यूनतम कानूनी उम्र 13 वर्ष निर्धारित की गई है, जबकि लड़कों के लिए यह सीमा 15 वर्ष है।
हालांकि, कानून में एक और प्रावधान मौजूद है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना का विषय रहा है। यदि लड़की के पिता की सहमति हो और कोई न्यायाधीश अनुमति दे दे, तो इससे भी कम उम्र में विवाह संभव हो सकता है।
कानूनी प्रावधानों के अनुसार कुछ मामलों में 8 वर्ष और 9 माह की उम्र यानी लगभग नौ चंद्र वर्षों में भी विवाह की अनुमति दी जा सकती है।
यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने कई बार ईरान से इस कानून में संशोधन करने की मांग की है। हालांकि ईरान की सरकार का कहना है कि सामाजिक और धार्मिक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था बनाई गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान में अधिकांश महिलाएं 25 से 29 वर्ष की उम्र के बीच अपने पहले बच्चे को जन्म देती हैं।
रिपोर्ट्स में बताया गया है कि करीब 87 प्रतिशत महिलाएं इसी आयु वर्ग में पहली बार मां बनती हैं। इसका अर्थ है कि भले ही विवाह जल्दी हो जाए, लेकिन मातृत्व की योजना कई वर्षों बाद बनाई जाती है।
ईरान के सरकारी आंकड़ों के अनुसार:
- 2024 में पहली बार मां बनने वाली महिलाओं की औसत उम्र 27.4 वर्ष थी
- 2025 के पहले पांच महीनों में यह बढ़कर 27.7 वर्ष हो गई
यह आंकड़े बताते हैं कि ईरान में मातृत्व की उम्र धीरे-धीरे बढ़ रही है। समाजशास्त्रियों का मानना है कि यह बदलाव सामाजिक और आर्थिक कारणों से हो रहा है।
ईरान तेजी से शहरी समाज में बदल रहा है। शहरों में रहने वाली महिलाएं पहले शिक्षा और करियर को प्राथमिकता देती हैं।
इसके कारण शादी के बाद भी कई साल तक बच्चे की योजना टाल दी जाती है।
पिछले दो दशकों में ईरान में महिला शिक्षा का स्तर तेजी से बढ़ा है। बड़ी संख्या में महिलाएं विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रही हैं और नौकरी भी कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च शिक्षा और करियर के अवसर ईरान में मातृत्व की उम्र को प्रभावित करने वाले सबसे बड़े कारणों में से एक हैं।
ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और महंगाई से जूझ रही है। ऐसे में कई युवा दंपति आर्थिक स्थिरता मिलने तक बच्चे की योजना टालना पसंद करते हैं।
ईरान में 2024 के दौरान औसत फर्टिलिटी रेट 2.08 बच्चे प्रति महिला दर्ज किया गया।
यह दर 2023 की तुलना में लगभग 22.77 प्रतिशत अधिक बताई गई है। यह वृद्धि ईरान सरकार की उन नीतियों का परिणाम हो सकती है, जिनका उद्देश्य गिरती जन्मदर को नियंत्रित करना है।
ईरान सरकार पिछले कुछ वर्षों से जन्मदर बढ़ाने के लिए कई कदम उठा रही है। इनमें शामिल हैं:
- परिवारों को आर्थिक प्रोत्साहन
- मातृत्व अवकाश में वृद्धि
- बच्चों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं
सरकार का मानना है कि यदि ईरान में मातृत्व की उम्र बहुत अधिक बढ़ती है तो भविष्य में जनसंख्या संतुलन पर असर पड़ सकता है।
कानूनी रूप से कम उम्र में विवाह संभव होने के बावजूद ईरान में किशोरावस्था में मातृत्व बहुत आम नहीं है।
अधिकांश महिलाएं शादी के बाद कुछ वर्षों तक परिवार की योजना नहीं बनातीं। यही कारण है कि ईरान में मातृत्व की उम्र आमतौर पर 27 से 28 वर्ष के आसपास रहती है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह सामाजिक परिवर्तन का संकेत है। नई पीढ़ी की महिलाएं पहले शिक्षा, आर्थिक स्थिरता और व्यक्तिगत विकास को महत्व दे रही हैं।
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण देश पहले ही वैश्विक चर्चा में है।
ऐसे समय में ईरान में मातृत्व की उम्र और विवाह कानूनों पर बहस तेज हो गई है। कई अंतरराष्ट्रीय संगठन इस मुद्दे को मानवाधिकार और महिला अधिकारों से जोड़कर देख रहे हैं।
हालांकि ईरान के कई धार्मिक और सामाजिक समूहों का कहना है कि पश्चिमी देशों की तुलना में ईरान की सामाजिक संरचना अलग है, इसलिए इन आंकड़ों को उसी संदर्भ में समझना चाहिए।
ईरान का सामाजिक ढांचा कई मायनों में विरोधाभासी दिखाई देता है। एक ओर जहां कानून के अनुसार लड़कियों की शादी की उम्र बेहद कम है, वहीं दूसरी ओर ईरान में मातृत्व की उम्र अपेक्षाकृत अधिक है।
यह दर्शाता है कि समाज में धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है। शिक्षा, शहरीकरण और आर्थिक परिस्थितियों ने पारंपरिक पारिवारिक योजनाओं को प्रभावित किया है।
आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ईरान में मातृत्व की उम्र और बढ़ती है या सरकार की नीतियां जन्मदर को बढ़ाने में सफल होती हैं।

