दरअसल, स्टाफ साइड ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को एक ज्ञापन सौंपा है. इसमें हाउस बिल्डिंग एडवांस और कंप्यूटर एडवांस जैसी पुरानी योजनाओं की लिमिट बढ़ाने के साथ-साथ, कर्मचारियों की सहूलियत के लिए 3 नए तरह के एडवांस शुरू करने की जोरदार वकालत की गई है.
आइए जानते हैं कि कर्मचारियों की तरफ से क्या मांगें रखी गई हैं और उनके पीछे क्या दलीलें दी गई हैं:
स्टाफ साइड ने मांग की है कि कर्मचारियों को कार खरीदने के लिए अधिकतम 10 लाख रुपये का एडवांस दिया जाना चाहिए. सबसे बड़ी बात यह है कि इस लोन को पूरी तरह ब्याज मुक्त रखने की सिफारिश की गई है.
इसके पीछे कर्मचारियों का कहना है कि आज के दौर में कार कोई लग्जरी यानी ऐशो-आराम की चीज नहीं रह गई है. परिवार के साथ सुरक्षित सफर करने के लिए यह हर किसी की बुनियादी जरूरत बन चुकी है. इसलिए 8वें वेतन आयोग को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए.
देश के अलग-अलग हिस्सों में कभी भारी बारिश, कभी बाढ़, तो कभी चक्रवात और सूखे जैसे हालात बने रहते हैं. ऐसे संकट के समय कर्मचारियों की मदद के लिए स्टाफ साइड ने एक महीने की बेसिक सैलरी के बराबर एडवांस देने की मांग की है, जिसे कर्मचारी 24 किस्तों में वापस कर सकें. इसके पीछे तर्क देते हुए ज्ञापन में कहा गया है कि पहले केंद्रीय कर्मचारियों को यह सुविधा मिलती थी, लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया. बदलते मौसम और प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए इस 'ब्याज मुक्त' एडवांस को दोबारा शुरू करना बेहद जरूरी है.
भारत त्योहारों का देश है, जहां हर धर्म और समुदाय के लोग पूरे उत्साह से उत्सव मनाते हैं. इन त्योहारों पर होने वाले खर्चों को देखते हुए स्टाफ साइड ने मांग की है कि कर्मचारियों को एक महीने की बेसिक सैलरी के बराबर फेस्टिवल एडवांस दिया जाए. इस रकम को कर्मचारी 10 आसान किस्तों में चुका सकते हैं. जेसीएम (JCM) की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में आधिकारिक पक्ष ने इस एडवांस को दोबारा शुरू करने पर सहमति तो जताई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर यह अब तक लागू नहीं हो सका है. इसलिए अब इसे 8वें वेतन आयोग के जरिए बहाल करने की मांग की गई है.
फिलहाल, 8वां वेतन आयोग अलग-अलग पक्षों और संगठनों से उनके सुझाव और ज्ञापन ले रहा है. उम्मीद जताई जा रही है कि आयोग इन सभी मांगों का बारीकी से अध्ययन करेगा और अपने गठन के 18 महीनों के भीतर सरकार को अपनी अंतिम सिफारिशें सौंप देगा. अगर सरकार इन मांगों को हरी झंडी दे देती है, तो केंद्रीय कर्मचारियों के लिए यह एक बड़ी राहत होगी.

