धार्मिक ग्रंथों और विभिन्न मान्यताओं के अनुसार, रावण की उम्र सामान्य मानव से कहीं अधिक थी और उसका जीवन हजारों वर्षों तक फैला हुआ था।
रामायण में उल्लेख मिलता है कि ने अपने भाइयों कुम्भकर्ण और विभीषण के साथ मिलकर ब्रह्माजी की 11,000 वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। इस तपस्या के फलस्वरूप उसे अपार शक्तियां और वरदान प्राप्त हुए, जिसने उसे लगभग अजेय बना दिया। यही कारण था कि रावण देवताओं तक के लिए चुनौती बन गया।
रामायण के अनुसार, रावण का वध आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को हुआ था। यही दिन आज विजयादशमी (दशहरा) के रूप में मनाया जाता है। युद्ध की अवधि को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं: कुछ मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम और रावण के बीच युद्ध 8 दिनों तक चला। वहीं, कुछ ग्रंथों और लोक मान्यताओं में इस युद्ध को 84 दिनों तक चलने वाला बताया गया है। हालांकि यह स्पष्ट माना जाता है कि राम ने लगातार 8 दिनों तक युद्ध कर अंततः रावण का वध किया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रीराम के हाथों अंत होने तक रावण की आयु लगभग 39,000 वर्ष 16 माह और 9 दिन बताई जाती है। वहीं कुछ अन्य मान्यताओं में कहा गया है कि के समय रावण की आयु 8,00,000 वर्ष थी। इसे 112 दिव्य वर्षों के बराबर माना जाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि रावण का जीवन काल सामान्य मानव से कहीं अधिक था।
मान्यताओं के अनुसार, रावण ने 72 × 400 = 28,800 वर्षों तक लंका पर शासन किया। इतने लंबे समय तक शासन करना उसकी शक्ति, रणनीति और प्रशासनिक क्षमता को दर्शाता है।
रावण के वध के बाद से ही हर वर्ष दशहरा का पर्व मनाया जाता है, जो अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। यह पर्व हमें यह संदेश देता है कि चाहे बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः सत्य और न्याय की ही जीत होती है।

