उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने सख्त तेवरों और बेबाक बयानों के लिए हमेशा चर्चा में रहते हैं। हाल ही में वे बिजनौर जिले के बढ़ापुर क्षेत्र में आयोजित एक बड़े समारोह में शामिल हुए।
इस दौरान उन्होंने मंच से जनता को संबोधित करते हुए गाजियाबाद के बहुचर्चित सूर्या उर्फ सूर्यप्रताप हत्याकांड मामले पर एक बेहद कड़ा और बड़ा बयान दिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गाजियाबाद की घटना का जिक्र करते हुए साफ लफ्जों में कहा कि उत्तर प्रदेश में दोस्ती या किसी भी अन्य रिश्ते की आड़ लेकर अपराध करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने परिवार के मुखियाओं को नसीहत देते हुए कहा कि अगर कोई अपनी नालायक औलाद को समझा नहीं पा रहा है, तो समझो कि वह बहुत बड़ी गलती कर रहा है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार की संवेदनाएं हमेशा आम और बेकसूर नागरिकों के साथ हैं, जबकि अपराधियों और कानून की धज्जियां उड़ाने वालों के खिलाफ सरकार की कठोर कार्रवाई इसी तरह लगातार जारी रहेगी।
इन दिनों तमाम मौलवियों और मौलानाओं की तरफ से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किए जाने की मांग वाले बयान सामने आ रहे हैं। इस पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गौ केवल एक साधारण पशु नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों लोगों की आस्था, धर्म और संस्कारों का अटूट प्रतीक है। उन्होंने आगे कहा कि गौ हमारी माता है और हमारा उससे जन्म-जन्मांतर का नाता है। क्या मां और बेटे के पावन रिश्ते को साबित करने के लिए किसी सरकारी घोषणा की जरूरत होती है? क्या किसी बेटे को यह सिखाना पड़ता है कि यह तुम्हारी मां है और तुम्हें इसका सम्मान करना चाहिए?
सीएम योगी ने भारतीय संस्कृति का हवाला देते हुए कहा कि हमारे देश में मां के प्रति जो आदर और सम्मान का भाव है, वही भाव गौ माता के प्रति भी सदियों से रखा जाता है। इसलिए गाय को सिर्फ एक जानवर या पशु कहना बिल्कुल भी उचित नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि हमने गाय को माता का दर्जा दिया है, इसलिए वह हमारे लिए पूजनीय माता हैं। जो लोग गौ माता को केवल एक चार पैर वाला पशु समझते हैं, असल में उनकी खुद की सोच पशु के समान ही है।
अपने इस आक्रामक संबोधन में सीएम योगी ने बकरीद के त्योहार के दिन सोशल मीडिया पर साझा की गई कुछ विवादित पोस्टों का भी खुलकर जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बकरीद के दौरान कुछ खुराफाती लोगों ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर गौ माता की तस्वीरों का इस्तेमाल करते हुए आपत्तिजनक पोस्ट शेयर की थीं। इस हरकत पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक गुरुओं और नेताओं को अपने समर्थकों व अनुयायियों को सही राह दिखानी चाहिए और उन्हें समझाना चाहिए। उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि गौ माता के सम्मान के साथ किसी भी प्रकार की हिमाकत या खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसा करने वालों को इसके बेहद गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि गौ माता को किसी भी सरकारी दस्तावेज या औपचारिक ऐलान की कोई जरूरत नहीं है। उनके शब्दों में, "गौ माता तो इस देश की स्वघोषित राष्ट्रमाता हैं।" जैसे दुनिया में किसी भी इंसान को यह बताने की आवश्यकता नहीं पड़ती कि उसकी असली मां कौन है, ठीक वैसे ही गौ माता के महत्व और उनकी महिमा को भी किसी कागजी घोषणा की आवश्यकता नहीं है।
मुख्यमंत्री ने अपने इस तर्क को आम जनता को और आसानी से समझाने के लिए मां गंगा का बेहद खूबसूरत उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि पूरे देश में लोग गंगा को नदी नहीं बल्कि मां मानते हैं, उनकी श्रद्धा से पूजा-आरती करते हैं और खुद को 'गंगा पुत्र' कहकर गर्व का अनुभव करते हैं। भारत के तमाम बड़े तीर्थ, पवित्र स्नान और धार्मिक संस्कार गंगा के पावन तटों पर ही संपन्न होते हैं। ऐसे में आज तक किसी सरकार को यह बताने की जरूरत नहीं पड़ी कि गंगा हमारी माता है। यह आस्था और भावना लोगों के भीतर बचपन से उनके संस्कारों में रची-बसी होती है।
अपने भाषण के आखिरी हिस्से में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पाकिस्तान में हो रहे धार्मिक उत्पीड़न और अत्याचार का शिकार होकर भारत आए विस्थापित हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक परिवारों का मुद्दा भी बेहद प्रखरता से उठाया। उन्होंने विरोधी खेमे पर निशाना साधते हुए कहा कि देशभर में शरणार्थी बनकर रह रहे इन विस्थापितों के दर्द पर कई मौलवी और मौलाना कभी भी खुलकर कुछ नहीं बोलते। उन्होंने कहा कि यदि ये लोग पड़ोसी देश में उन अल्पसंख्यकों की संपत्तियों पर हुए अवैध कब्जों और वहां के कट्टरपंथियों द्वारा किए गए जुल्मों के खिलाफ भी अपनी आवाज बुलंद करते, तो समाज में यह एक बहुत अधिक सकारात्मक और सच्ची पहल मानी जाती।

