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PM मोदी ने यूं ही नहीं की अश्वगंधा की तारीफ, घोड़ों जैसी ताकत और नसों में खलबली मचा देती है जड़ी-बूटी, हर कण में संजीवनी'

PM मोदी ने यूं ही नहीं की अश्वगंधा की तारीफ, घोड़ों जैसी ताकत और नसों में खलबली मचा देती है जड़ी-बूटी, हर कण में संजीवनी'

प्रधानमंत्री ने कहा है कि अब यह दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने प्रमाणित कर दिया है कि अश्वगंधा हमारी सेहत के लिए बेशकीमती हीरा है इसलिए इसकी डिमांड विदेश में काफी बढ़ गई है.

इसलिए अश्वगंधा को पब्लिक हेल्थ सिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है.

दरअसल, पीएम नरेंद्र मोदी अश्वगंधा को लेकर यूं ही नहीं इतनी बात कही है. वास्तव में अश्वगंधा के इतने फायदे हैं कि आप भी हैरान हो जाएंगे. आमतौर पर लोग इसे ताकत बढ़ाने और यौन उत्तेजना को बढ़ाने वाली जड़ी-बूटी मानते हैं लेकिन अश्वगंधा इससे कहीं ज्यादा पावरफुल है. सबसे बड़ी बात यह है कि अश्वगंधा हमारी नसों के लिए बहुत फायदेमंद है. नसों की कमजोरी के कारण हमारे शरीर में थकान और कमजोरी रहती है. कई ऐसी बीमारियां हैं, अगर अश्वगंधा का नियमित सेवन किया जाए तो इन सबका खतरा कम हो सकता है. यहां तक कि कैंसर भी. अब यह जानते हैं कि वैज्ञानिक रुप से अश्वगंधा के कितने फायदे हैं.

अश्वगंधा क्यों है इतना खास
अश्वगंधा एक पौधा है जिसे भारत में औषधि के रूप में करीब 3000 साल से इस्तेमाल किया जाता है. इसे इंडियन जिनसेंग या इंडियन विंटर चेरी कहा जाता है. अश्वगंधा का अर्थ ही इसके गुणों को परिभाषित करता है. अश्वगंधा शब्द अश्व और गंध से बना है, जिसमें अश्व का अर्थ घोड़ा और गंध को अर्थ खूशबू है. यानी घोड़ों जैसी ताकत देने वाली सुगंधित जड़ी-बूटी. अश्वगंधा पौधे की जड़ से पाउडर बनाया जाता है और यही दवा के रूप में इस्तेमाल होता है.

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अश्वगंधा के बारे में विज्ञान क्या कहता है
हमारे आयुर्वेद में ही अश्वगंधा के औषधीय गुणों की खोज की गई. इस तरह हम 3000 सालों से इसके गुणों के बारे में जानते हैं. पिछले कुछ सालों से दुनिया भर में अश्वगंधा के मेडिसीनल गुणों पर कई रिसर्च हुई है. पब मेड जर्नल ने रिसर्च के आधार पर बताया है कि अश्वगंधा में कई तरह के फायटोकेमिकल होते हैं जिनमें स्टेरॉइडल लेक्टोन प्रमुख है. इस कारण यह तंत्रिका तंत्र को उद्दीपीत करता है जिससे नसों में जबरदस्त ताकत आती है. रिसर्च में पाया गया है कि अश्वगंधा में मौजूद तत्व तनाव, एंग्जाइटी, अवसाद को कम करता है और नींद की गुणवत्ता सुधारता है. रिसर्च के मुताबिक यह महिला और पुरुष में दोनों प्रजनन क्षमता को बूस्ट करता है. अश्वगंधा में थायरॉयड को संतुलित करने की भी क्षमता होती है. साथ ही यह कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करता है और हार्ट डिजीज से जुड़े ऑक्सीडेटिव स्ट्रैस को कम करता है.अश्वगंधा एक ऐसी जड़ी-बूटी है जो टॉनिक की तरह काम करती है और शरीर और मन में ऊर्जा, दीर्घायु और संतुलन को बढ़ावा देती है. पीएमसी की एक रिपोर्ट के अनुसार अश्वगंधा में तंत्रिका तंत्र की रक्षा करने वाले न्यूरोप्रोटेक्टिव तत्व होता है जो शरीर और मन को शांत रखता है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस जड़ी-बूटी में एंटी-इंफ्लामेशन यानी सूजन रोधी, बैक्टीरिया-रोधी, शुगर रोधी और हार्ट प्रोटेक्टिव गुण होता है.

आयुर्वेद में अश्वगंधा के फायदे
भारतीय पारंपरिक चिकित्सा में इसके उपयोग का लगभग 3000 साल पुराना है. इसकी जड़ का इस्तेमाल कामोत्तेजक, टॉनिक, मूत्रवर्धक, कृमिनाशक और उत्तेजक के रूप में किया जाता रहा है. कुछ ऐसे भी प्रमाण भी मिले हैं कि अश्वगंधा सप्लीमेंट बांझपन,कैंसर-रोधी और मधुमेह के इलाज में मददगार हो सकता है. अध्ययनों से संकेत मिलता है कि यह हार्ट के मस्लस को मजबूत करता है और हाइपोथायरॉयडिज्म में सहायक होता है. इसके साथ ही यह मांसपेशियों की ताकत व रिकवरी को बेहतर बनाता है.

अश्वगंधा का इस्तेमाल कैसे करें

  1. दूध के साथ-टीओआई की खबर के मुताबिक अश्वगंधा वाला दूध एक नाइट टॉनिक माना जाता है. इसे बनाने के लिए आधा छोटी चम्मच अश्वगंधा पाउडर को गुनगुने दूध में मिलाएं और उसमें एक चुटकी दालचीनी या जायफल डालें. इसे सोने से करीब एक घंटा पहले पीना चाहिए. यह तनाव को कम करने में मदद करता है और अच्छी नींद लाने में सहायक होता है. इस दूध की पोषण वैल्यू बढ़ाने के लिए आप इसमें मेवों का पाउडर भी मिला सकते हैं. इसके लिए कुछ बादाम और काजू काटकर हल्का भून लें, फिर पीसकर पाउडर बना लें और दूध में डाल दें. अच्छी तरह मिलाकर सेवन करें.इसी तरह आप अश्वगंधा की खीर भी बना सकते हैं. इसके लिए दूध उबालें, उसमें भीगे हुए चावल डालें और अच्छी तरह पकाएं. अंत में चीनी, केसर और अश्वगंधा डालें. इसे अपनी पसंद के अनुसार गरम या ठंडा परोस सकते हैं.
  2. स्मूदी और ब्रेकफास्ट बाउल-अश्वगंधा पाउडर की एक छोटी-सी चुटकी आप फलों की स्मूदी, केला-खजूर शेक या ओट्स में भी मिला सकते हैं. शुरुआत के लिए सेब, केला और कीवी को काट लें, इसमें कुछ बेरीज़ मिलाएं. अब ऊपर से एक चम्मच शहद डालें और फिर अश्वगंधा पाउडर की एक चुटकी मिलाएं. अच्छी तरह मिलाकर खाएं. इसके अलावा दही, केला और भीगे हुए मेवों से स्मूदी बनाएं. ऊपर से अश्वगंधा पाउडर की एक चुटकी डालें और ताज़ा-ताज़ा पिएं. बेरी स्मूदी के लिए अपनी पसंद की बेरीज़ को दही, मेवे और बीजों के साथ ब्लेंड करें, उसमें अश्वगंधा पाउडर की एक चुटकी मिलाएं और तुरंत पी लें.
  3. अश्वगंधा कुकी-यह बच्चों को अश्वगंधा खिलाने का एक आसान और समझदारी भरा तरीका है. इसे बनाने के लिए 1 कप गेहूं का आटा लें. इसमें 1/2 छोटा चम्मच अश्वगंधा पाउडर, 1/2 छोटा चम्मच बेकिंग पाउडर, 1/2 छोटा चम्मच बेकिंग सोडा, 1/4 छोटा चम्मच दालचीनी पाउडर, एक चुटकी नमक और 1/2 कप गुड़ डालें. अब इसमें 1/4 कप ठंडा मक्खन, थोड़ा सा वनीला एसेंस और कटे हुए मेवे मिलाकर नरम आटा गूंथ लें. आटे से छोटी-छोटी कुकी का आकार बनाएं और बेकिंग पेपर लगी ट्रे में रखें. इन्हें 180 डिग्री सेल्सियस पर 12-15 मिनट तक बेक करें. ठंडा होने पर कुकीज़ को किसी डिब्बे में रख लें और सुबह दूध के साथ खाएं.
  4. हर्बल चाय या काढ़ा-इस हर्ब को रोज़मर्रा के खाने में शामिल करने का एक लोकप्रिय तरीका है अश्वगंधा पाउडर को 2 कप पानी में उबालना. इसमें 1 छोटा चम्मच कद्दूकस किया हुआ अदरक, 2-4 तुलसी के पत्ते और एक चुटकी काली मिर्च डालें. इसे उबालकर छान लें और सुबह गर्मागर्म पीएं.
  5. ड्राय फ्रूट्स लड्डू-अश्वगंधा को घर पर तैयार किए गए लड्डुओं में भी मिलाया जा सकता है, जो खजूर, मेवे और घी से बनते हैं. इसके लिए बादाम, पिस्ता और अखरोट जैसे मेवे घी में भूनें. इन्हें ठंडा होने दें और अच्छी तरह पीस लें. खजूर को गरम करके मैश करें और इसमें एक चुटकी अश्वगंधा पाउडर मिलाएं. फिर इसे लड्डू का आकार दें. लड्डू को एक जार में रखें और रोज़ाना एक लड्डू खाएं.
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