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सावधान! बिना चोट त्वचा पर उभर रहे हैं नीले-बैंगनी निशान, जानें शरीर देता है क्या खामोश चेतावनी'

सावधान! बिना चोट त्वचा पर उभर रहे हैं नीले-बैंगनी निशान, जानें शरीर देता है क्या खामोश चेतावनी'

म सभी ने कभी ना कभी अपने हाथों और पैरों पर बिना किसी बड़ी चोट के अचानक नीले या काले निशान (Bruises) बने हुए देखे होंगे। शरीर पर उभरने वाले ये नीले-बैंगनी निशान कई बार सामान्य होते हैं लेकिन कई बार शरीर के अंदरूनी संकेतों की ओर इशारा कर रहे होते हैं।

सीके बिरला अस्पताल की आंतरिक चिकित्सक डॉ. मनीषा अरोरा कहती हैं कि हाथों और पैरों पर बिना किसी स्पष्ट चोट के नीले निशान या चोट के धब्बे दिखाई देना आम बात हो सकती है, जिसे अक्सर लोग हल्के में ले लेते हैं। चिकित्सकीय रूप से, ये चोट तब बनती है जब त्वचा के नीचे मौजूद छोटी रक्त वाहिकाएं फट जाती हैं और रक्त आसपास के ऊतकों में फैल जाता है। हालांकि टकराव या हल्की चोट इसके सामान्य कारण हैं, लेकिन बार-बार या बिना कारण दिखाई देने वाली चोटें किसी अंदरूनी समस्या की ओर संकेत कर सकती हैं।

उम्र से जुड़े बदलाव इस स्थिति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समय के साथ त्वचा पतली होने लगती है और उसे सहारा देने वाले ऊतक कमजोर पड़ जाते हैं, जिससे रक्त वाहिकाएं अधिक नाजुक हो जाती हैं। इसका असर खासतौर पर हाथों और पैरों पर दिखता है, जहां रोजमर्रा की गतिविधियों या हल्के दबाव से भी चोट के निशान उभर सकते हैं।

पोषण की कमी भी शरीर की रक्त वाहिकाओं और रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। विटामिन C, विटामिन K या विटामिन B12 की कमी से रक्त वाहिकाओं कमजोर होने लगती हैं, जिससे उनकी रक्तस्राव को रोकने की क्षमता प्रभावित होती है। इसके अलावा, लीवर से जुड़ी बीमारियां, रक्त के थक्के बनने से संबंधित विकार या कुछ ऑटोइम्यून स्थितियां भी बिना वजह चोट पड़ने की संभावना को बढ़ा सकती हैं।

कुछ दवाइयों का सेवन भी चोट के निशान आसानी से पड़ने का कारण बन सकता है। ऐसी दवाएं जो रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं, उनमें ब्लड थिनर दवाएं, कुछ दर्द निवारक दवाएं जैसे नॉन-स्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स, और लंबे समय तक ली जाने वाली कॉर्टिकोस्टेरॉइड दवाएं शामिल हैं। ये दवाएं या तो रक्त का थक्का बनने की गति को धीमा कर देती हैं या रक्त वाहिकाओं को कमजोर कर देती हैं, जिससे हल्का सा दबाव भी स्पष्ट चोट में बदल सकता है।

सलाह- इन सभी कारणों को देखते हुए कुछ संकेतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। यदि बिना कारण बार-बार चोट के निशान दिखें, मसूड़ों, नाक या मल में खून आने लगे, या अचानक चोट पड़ने का पैटर्न बदल जाए, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। साथ ही, ब्लड थिनर जैसी दवाओं का लंबे समय तक उपयोग हमेशा डॉक्टर की निगरानी में ही किया जाना चाहिए।

रोकथाम के लिहाज से, दवाओं के प्रभाव के प्रति जागरूकता, संतुलित पोषण और समय पर मेडिकल जांच यह समझने में मदद कर सकती है कि चोट के निशान सामान्य हैं या किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत।

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