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हादसे में दोनों हाथ गंवाने के बाद भी मालविका लोगो के लिए बनी मिसाल

हर लड़की की ख्वाहिश होती है की वो सूंदर दिखे। हमारे समाज में एक लड़की के लिए उसकी शारीरिक सुंदरता बेहद मायने रखती है। उसकी पहचान उसके गुणों से ज्यादा उसके चेहरे और शारीरिक बनावट से होती है। ऐसे में शारीरिक अक्षमता के साथ जीना तो किसी लड़की के लिए अभिशाप के जैसा है।

आज हम आपको मिलवाने जा रहे हैं मोटिवेशनल स्पीकर मालविका अय्यर से जिसने अपने दोनो हाथ बचपन में एक हादसे में खो दिए।

मालविका ने भी अपने जीवन के सबसे बड़े हादसे के बाद जीवन जीने का उम्मीद ना छोड़ी और अपने जीवन का रूख ही बदल दिया। आज वो लड़की करोड़ो लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। उस घटना को याद करते हुए मालविका बताती हैं कि वो मई, 2002 की 26 तारीख थी और रविवार का दिन था। दरअसल मेरे घर के पास ही एक ग्रेनेड फट गया। हालांकि मेरी जान तो बच गई, पर उस हादसे में मैंने अपने दोनों हाथ गंवा दिए और इसके साथ ही मेरे दोनों पैर भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।

उस हादसे के बाद मालविका ने हिम्मत नहीं हारी और पढ़ना जारी रखा। उन्होंने सेंट स्टीफन कॉलेज से अर्थशास्त्र में ऑनर्स की डिग्री ली। बिना हाथों के ही पढ़ाई का ये ज़ज्बा और सामाजिक सरोकारों में रूचि को देखते हुए मालविका को उस समय तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से मिलने के लिए राष्ट्रपति भवन की ओर से आमंत्रण भी मिला था। साथ ही कई विदेशी संस्थाओं से उन्हें अपने यहां मोटिवेशनल स्पीच देने के लिए बुलाया जाने लगा।

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