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8th Pay Commission : फिटमेंट फैक्टर पर बढ़ी बहस, क्या कर्मचारियों की बेसिक सैलरी ₹72,000 तक पहुंच सकती है?

8th Pay Commission : फिटमेंट फैक्टर पर बढ़ी बहस, क्या कर्मचारियों की बेसिक सैलरी ₹72,000 तक पहुंच सकती है?

News Remind 2 weeks ago

8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर बना सबसे बड़ा मुद्दा

देशभर के एक करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की निगाहें इस समय 8वें वेतन आयोग पर टिकी हुई हैं। आयोग से जुड़ी चर्चाओं में सबसे अधिक जिस विषय पर बहस हो रही है, वह है फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) । यही वह महत्वपूर्ण गुणांक है जिसके आधार पर कर्मचारियों की नई बेसिक सैलरी और पेंशन तय की जाती है।

कर्मचारी संगठन मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों, बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत को देखते हुए फिटमेंट फैक्टर में बड़ी बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। कुछ यूनियनें इसे 3.0 से 4.0 तक ले जाने की वकालत कर रही हैं।

फिटमेंट फैक्टर क्या होता है?

सरल शब्दों में समझें तो फिटमेंट फैक्टर वह गुणक (Multiplier) है, जिससे वर्तमान बेसिक वेतन को गुणा करके नई सैलरी निर्धारित की जाती है।

7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 तय किया गया था। इसी आधार पर कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन ₹7,000 से बढ़ाकर ₹18,000 किया गया था।

अब 8वें वेतन आयोग में यही सवाल सबसे महत्वपूर्ण बन गया है कि नया फिटमेंट फैक्टर कितना होगा और इसका कर्मचारियों की आय पर कितना प्रभाव पड़ेगा।

महंगाई के चलते बढ़ी वेतन संशोधन की मांग

कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि 2016 के बाद से महंगाई में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर पिछले लगभग एक दशक में जीवनयापन की लागत में 50 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

इसी कारण कर्मचारी संगठन मानते हैं कि मौजूदा 2.57 फिटमेंट फैक्टर अब पर्याप्त नहीं है और इसे बढ़ाकर 3.0 से 4.0 के बीच किया जाना चाहिए।

विभिन्न कर्मचारी संगठनों की मांगें

अलग-अलग संगठनों ने आयोग के सामने अलग-अलग प्रस्ताव रखे हैं।

BPMS का प्रस्ताव

  • फिटमेंट फैक्टर: 4.0
  • प्रस्तावित न्यूनतम बेसिक वेतन: ₹72,000

NC-JCM स्टाफ साइड

  • फिटमेंट फैक्टर: 3.833
  • प्रस्तावित न्यूनतम वेतन: लगभग ₹69,000

AIDEF

  • फिटमेंट फैक्टर: 3.833
  • प्रस्तावित न्यूनतम वेतन: लगभग ₹69,000

महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन संगठन

  • फिटमेंट फैक्टर: 3.8
  • प्रस्तावित वेतन: ₹65,000 से ₹68,400 के बीच

FNPO

  • फिटमेंट फैक्टर: 3.0 से 3.25
  • प्रस्तावित वेतन: ₹54,000 से ₹58,500

AITUC

  • न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर: 3.0
  • प्रस्तावित न्यूनतम वेतन: ₹54,000

विशेषज्ञ क्या मानते हैं?

वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को कर्मचारियों की अपेक्षाओं और सरकारी वित्तीय भार के बीच संतुलन बनाना होगा।

कई विश्लेषकों के अनुसार, अंतिम फिटमेंट फैक्टर 2.28 से 2.86 के बीच रहने की संभावना अधिक है। यदि 2.86 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाता है, तो वर्तमान ₹18,000 की न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़कर लगभग ₹51,480 हो सकती है।

यह विकल्प कर्मचारियों को राहत देने के साथ-साथ सरकारी खर्च को भी नियंत्रित रखने वाला माना जा रहा है।

8वें वेतन आयोग की ताजा गतिविधियां

आयोग ने कर्मचारी संगठनों और अन्य हितधारकों से सुझाव और ज्ञापन प्राप्त करने की प्रक्रिया जारी रखी है।

हालिया अपडेट्स के अनुसार:

ज्ञापन जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ी

आयोग ने सुझाव और ज्ञापन जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 15 जून 2026 कर दी है।

भुवनेश्वर में बैठक

  • तिथि: 6-7 जुलाई 2026
  • उद्देश्य: कर्मचारी संगठनों से चर्चा और सुझाव प्राप्त करना

कोलकाता में बैठक

  • तिथि: 9-10 जुलाई 2026
  • उद्देश्य: वेतन, पेंशन और फिटमेंट फैक्टर से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श

फिटमेंट फैक्टर का किन लाभों पर पड़ेगा असर?

फिटमेंट फैक्टर में बदलाव केवल बेसिक सैलरी तक सीमित नहीं रहेगा। इसका सीधा प्रभाव कई अन्य वित्तीय लाभों पर भी पड़ेगा।

इनमें शामिल हैं:

  • बेसिक पे
  • महंगाई भत्ता (DA)
  • मकान किराया भत्ता (HRA)
  • पेंशन
  • ग्रेच्युटी
  • रिटायरमेंट लाभ
  • अन्य भत्ते

यानी फिटमेंट फैक्टर जितना अधिक होगा, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलने वाले कुल लाभ भी उतने ही अधिक हो सकते हैं।

आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल आयोग की ओर से कोई अंतिम सिफारिश जारी नहीं की गई है। हालांकि कर्मचारी संगठनों की मांगों और विशेषज्ञों के आकलन को देखते हुए 2.8 से 3.0 के बीच फिटमेंट फैक्टर को संभावित विकल्प माना जा रहा है।

यदि सरकार यूनियनों की प्रमुख मांगों के करीब कोई फैसला लेती है, तो लाखों कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

निष्कर्ष

8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर सबसे महत्वपूर्ण विषय बनकर उभरा है। कर्मचारी संगठन जहां ₹54,000 से ₹72,000 तक न्यूनतम वेतन की मांग कर रहे हैं, वहीं विशेषज्ञ संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दे रहे हैं। आने वाले महीनों में आयोग की सिफारिशें और सरकार का अंतिम निर्णय करोड़ों कर्मचारियों और पेंशनर्स की आर्थिक स्थिति पर बड़ा असर डाल सकता है।

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