Major Hamza Arif Road Accident: राजस्थान के जैसलमेर जिले से एक अत्यंत दुखद खबर सामने आई है, जिसने पूरे इंदौर शहर और परिजनों को गहरे शोक में डुबो दिया है. देश की सीमा पर तैनात इंदौर के धनवंतरी नगर निवासी भारतीय सेना के मेजर हमजा आरिफ की एक भयानक सड़क दुर्घटना में जान चली गई. बेहद दर्दनाक बात यह है कि मेजर हमजा की शादी को अभी महज एक महीना ही पूरा हुआ था और जिस घर में हाल ही में शहनाइयां गूंज रही थीं, वहां अब केवल सिसकियां और चीख-पुकार सुनाई दे रही है.
अचानक सड़क पर आया ऊंट, अनियंत्रित होकर पलटी गाड़ी
जानकारी के अनुसार, मेजर हमजा आरिफ अपने दो अन्य सैन्य साथी अधिकारियों-लेफ्टिनेंट अभिनव और लेफ्टिनेंट आयुष्मान के साथ अपनी ड्यूटी पूरी करके वापस कैंप लौट रहे थे. इसी दौरान रास्ते में अचानक एक ऊंट उनकी तेज रफ्तार टाटा सफारी गाड़ी के सामने आ गया. ऊंट से जोरदार टक्कर होने के बाद गाड़ी अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे उतर गई और कई बार पलट गई. घटना की सूचना मिलते ही सेना के जवानों और स्थानीय पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर तीनों अधिकारियों को बाहर निकाला और मिलिट्री अस्पताल पहुंचाया. हालांकि, डॉक्टरों ने मेजर हमजा आरिफ को मृत घोषित कर दिया, जबकि दोनों गंभीर रूप से घायल लेफ्टिनेंट अधिकारियों का इलाज अस्पताल में चल रहा है.
कौन थे मेजर हमजा आरिफ?
मेजर हमजा आरिफ इंदौर के धनवंतरी नगर के रहने वाले थे. उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद साल 2016-17 के आसपास भारतीय सेना जॉइन की थी. बचपन से ही बेहद प्रतिभावान, होनहार और हंसमुख स्वभाव के हमजा ने सेना में अपनी 9 साल की सर्विस के दौरान ही 3 प्रमोशन हासिल किए थे.
हादसे वाले मार्ग पर सुरक्षा इंतजामों पर सवाल
यह हादसा जिस जगह पर हुआ, उसे लेकर स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. बताया जा रहा है कि उसी क्षेत्र में पहले भी एक बड़े सड़क हादसे में 30 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है. इसके बावजूद हाईवे पर आवारा मवेशियों की आवाजाही को रोकने और यातायात सुरक्षा के कड़े इंतजाम नहीं किए जा सके.
पूरे सैन्य सम्मान के साथ दी जाएगी अंतिम विदाई
हादसे की खबर मिलते ही समाज के लोग, स्थानीय नेता, रिश्तेदार और बचपन के दोस्त परिजनों को सांत्वना देने उनके घर पहुंचने लगे. उनके दोस्तों ने भावुक होते हुए बताया कि हमजा पढ़ाई में काफी होशियार और हमेशा हंसमुख रहने वाले इंसान थे. शहीद मेजर का पार्थिव शरीर उनके गृह नगर इंदौर लाया गया है, जहां उन्हें पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी.

