Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
दतिया उपचुनाव में फंसा पेंच: कम वोटिंग टर्नआउट ने बढ़ाई टेंशन, समझें बीजेपी और कांग्रेस के लिए क्या हैं इसके मायने

दतिया उपचुनाव में फंसा पेंच: कम वोटिंग टर्नआउट ने बढ़ाई टेंशन, समझें बीजेपी और कांग्रेस के लिए क्या हैं इसके मायने

News Tak 6 days ago

ध्य प्रदेश की चर्चित दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के मतदान के बाद अब नतीजों को लेकर सियासी अंकगणित और कयासबाजियों का दौर शुरू हो चुका है. इस बार के वोटिंग परसेंटेज और महिला मतदाताओं के रुझान ने राजनीतिक विश्लेषकों के साथ-साथ बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं.'MP Tak' से खास बातचीत में राजनीतिक विश्लेषक अमिताभ तिवारी ने दतिया उपचुनाव के वोटिंग पैटर्न, संभावित समीकरणों और एग्जिट पोल के आंकड़ों का बारीकी से विश्लेषण किया.

2023 के मुकाबले 10% कम टर्नआउट, किसे होगा फायदा?

2023 के मुख्य विधानसभा चुनाव में दतिया सीट पर रिकॉर्ड 80.20% मतदान दर्ज किया गया था लेकिन इस उपचुनाव में वोटिंग टर्नआउट करीब 10 प्रतिशत कम रहा है.

राजनीतिक विश्लेषण के मुताबिक

आमतौर पर कम मतदान का फायदा सत्ताधारी दल (इनकंबेंट) को मिलता माना जाता है, क्योंकि यह विपक्ष की ओर से किसी बड़े सत्ता-विरोधी लहर (Anti-Incumbency) के अभाव को दर्शाता है. इसके अलावा साल 2023 के चुनाव में दतिया में भारी मतदान के बावजूद बीजेपी के दिग्गज नेता नरोत्तम मिश्रा चुनाव हार गए थे. ऐसे में इस बार कम टर्नआउट का ऊंट किस करवट बैठेगा, यह देखना दिलचस्प होगा.

बीजेपी के लिए चिंता?

2023 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनावों में मध्य प्रदेश में 'लाडली बहना योजना' के प्रभाव के चलते महिला वोटर्स का टर्नआउट पुरुषों से भी अधिक रहा था. जिसने बीजेपी को बंपर जीत दिलाई थी. हालांकि, दतिया उपचुनाव में महिला मतदाताओं की हिस्सेदारी पिछले चुनावों के मुकाबले कम रही है.

चूंकि महिला मतदाता बीजेपी का मजबूत कैडर/वोट बैंक मानी जाती रही हैं, इसलिए महिलाओं के कम संख्या में निकलने का सीधा असर बीजेपी के वोट शेयर पर पड़ सकता है.

भीतरी भितरघात और स्थानीय समीकरण

दतिया उपचुनाव दोनों ही प्रमुख दलों के लिए साख का सवाल बना हुआ है:

बीजेपी के सामने चुनौती: बीजेपी के उम्मीदवार को लेकर 'बाहरी बनाम स्थानीय' का मुद्दा उछला है. साथ ही, नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद उनके समर्थकों का रुख और आंतरिक गुटबाजी नतीजों को प्रभावित कर सकती है.

कांग्रेस के अंदरूनी समीकरण: कांग्रेस उम्मीदवार की छवि स्थानीय स्तर पर बेहतर मानी जा रही है, लेकिन पूर्व विधायक के अयोग्य ठहराए जाने के बाद पार्टी के भीतर भी असंतोष की सुगबुगाहट देखने को मिली है.

जातीय गोलबंदी: चुनाव में मुख्य मुकाबला ठाकुर बनाम ब्राह्मण के इर्द-गिर्द सिमटता नजर आ रहा है.

मुख्यमंत्री मोहन यादव के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई

यह चुनाव मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व के लिए भी एक अहम इम्तिहान माना जा रहा है। बीजेपी ने इस चुनाव के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी संगठन में व्यक्ति से बड़ा संगठन सर्वोपरि है.

कब आएंगे नतीजे?दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों की घोषणा 3 अगस्त को होगी, जिसके बाद ही साफ हो पाएगा कि दतिया की जनता ने किस पर अपना भरोसा जताया है.

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: News Tak