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नैनीताल : राह चलती युवतियों से छेड़छाड़ करना पड़ा भारी, आरोपियों को पकड़कर बिच्छू घास लगाकर सिखाया सबक

नैनीताल : राह चलती युवतियों से छेड़छाड़ करना पड़ा भारी, आरोपियों को पकड़कर बिच्छू घास लगाकर सिखाया सबक

News Tak 1 week ago

Mukteshwar Viral Video: नैनीताल जिले के शांत माने जाने वाले मुक्तेश्वर इलाके में शनिवार सुबह एक ऐसा मामला सामने आया जिसने हर किसी को हैरान कर दिया. सड़क पर जा रही युवतियों से कथित छेड़छाड़ करने वाले दो युवकों को उनकी हरकत भारी पड़ गई. युवतियों ने बिना डरे पहले खुद ही दोनों का विरोध किया और उन्हें पकड़ लिया.

शोर सुनकर आसपास के ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए. इसके बाद दोनों युवकों को बिच्छू घास लगाकर सबक सिखाया गया. घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, शनिवार सुबह यह लड़कियां स्कूल और बाजार की तरफ जा रही थीं. तभी बाहरी इलाके से आए दो युवकों ने उनका पीछा करते हुए फब्तियां कसनी शुरू कर दीं. शुरुआती अनदेखी के बाद जब युवकों की अभद्रता सीमा पार करने लगी तो युवतियों का गुस्सा फूट पड़ा. उन्होंने हिम्मत दिखाते हुए बीच सड़क पर ही दोनों युवकों को दबोच लिया और उनकी जमकर पिटाई कर दी. शोर सुनकर पहुंचे ग्रामीणों ने भी पहुंच गए. उन्होंने मनचलों का मुंह काला किया और बिच्छू घास लगा दी.

मौके पर जमकर हुआ हंगामा

घटना के दौरान सड़क पर काफी देर तक गहमागहमी और हंगामे का माहौल बना रहा. स्थानीय लोगों और ग्रामीणों के कड़े विरोध के बाद मामले की खबर पूरे क्षेत्र में आग की तरह फैल गई. इस पूरे वाकये का वीडियो बनाकर किसी ने सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है.

पुलिस ने क्या कहा?

इस पूरी घटना की सूचना स्थानीय पुलिस प्रशासन को दे दी गई है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की बारीकी से जांच की जा रही है. पुलिस के मुताबिक, अगर घटना के संबंध में किसी भी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत दर्ज कराई जाती है तो मौके पर मौजूद साक्ष्यों और जांच के आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी.

क्या होता है बिच्छू खास?

बिच्छू घास एक जंगली पौधा है, जो उत्तराखंड समेत कई पहाड़ी राज्यों में पाया जाता है. इसकी पत्तियों और तनों पर बेहद महीन कांटेदार रोएं होते हैं. इन्हें छूते ही त्वचा में तेज जलन, चुभन और खुजली होने लगती है, जो बिच्छू के डंक जैसी महसूस होती है. इसी वजह से इसे बिच्छू घास कहा जाता है. इसका उपयोग कई जगहों पर सब्जी बनाने, रेशे निकालने और पारंपरिक चिकित्सा में भी किया जाता है. उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में यह पौधा बड़ी मात्रा में पाया जाता है. कई जगह इसे स्थानीय भाषा में कंडाली या सिसौंण भी कहा जाता है.

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