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Shesh Bharat: अगले प्रधानमंत्री की रेस में आया थलापति विजय का नाम, MOTN के सर्वे में दिखा जनता का ये मूड!

Shesh Bharat: अगले प्रधानमंत्री की रेस में आया थलापति विजय का नाम, MOTN के सर्वे में दिखा जनता का ये मूड!

News Tak 1 week ago

मिलनाडु की राजनीति में साउथ से पीएम का जो नारा कुछ वक्त से महज एक पॉलिटिकल कैंपेन लग रहा था, उसे देश के सबसे बड़े नेशनल सर्वे ने एक झटके में चुनावी हकीकत में बदल दिया है. इंडिया टुडे और सी-वोटर (C-Voter) के अगस्त 2026 के मूड ऑफ द नेशन' (MOTN) सर्वे ने देश के बड़े-बड़े नेताओं की नींद उड़ा दी है.

ज्यादा पुरानी बात नहीं है. 4 मई को नई-नई पार्टी बनाकर चुनाव लड़ने वाले विजय ने एकदम से तमिलनाडु का चुनाव जीत लिया. सरकार बना ली और एक एक्टर तमिलनाडु जैसे बड़े राज्य का सीएम बन गया. विजय की धमाकेदार एंट्री से पहले से खलबली मची है. अब विजय फॉर पीएम ट्रेंड सामने आने के बाद तमिलनाडु का ही नहीं, देश का मिजाज भी विजय के फेवर में जाना शुरू हुआ है. हालांकि सफर अभी काफी लंबा है.

विजय को पीएम बनने की मांग!

थलापति विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही उनकी पार्टी के बड़े नेताओं- आढव अर्जुन और राज्य के वित्त मंत्री मुरुगेसन ने सार्वजनिक मंचों से एक सुर में मांग उठानी शुरू की कि 'साल 2029 के आम चुनाव में देश का अगला प्रधानमंत्री दक्षिण भारत से होना चाहिए' और इसके लिए विजय ही सबसे योग्य चेहरा हैं. इस मांग को लेकर थूथुकुडी समेत तमिलनाडु के कई जिलों में विजय को 'भावी प्रधानमंत्री' बताते हुए बड़े-बड़े पोस्टर लगा दिए गए. लोगों ने इसे समर्थकों का अति-उत्साह माना लेकिन तभी एंट्री होती है सी-वोटर के सर्वे की, जिसने इस मांग को एक ठोस चुनावी हकीकत में बदल दिया.

सर्वे में क्या-कुछ पता चला?

MOTN के सर्वे में देश की जनता से पूछा गया कि 'अगले प्रधानमंत्री पद के लिए आपकी पहली पसंद कौन है?' सवाल के जवाब में पीएम मोदी करीब 49 परसेंट लोगों की पसंद के साथ टॉप पर बने हुए हैं. राहुल गांधी 27 परसेंट लोगों की पसंद के साथ दूसरे नंबर पर बने हुए हैं. सर्वे में पहली बार नाम आया थलापति विजय का. करीब 9 परसेंट लोगों ने विजय को देश के तीसरे सबसे पसंदीदा पीएम उम्मीदवार के तौर पर चुना.

पहली बार किसी सर्वे में आना, बिना किसी बड़े नेशनल अपील के 9 परसेंट पर पहुंचना एक इशारा तो है कि तमिलनाडु में उठी मांग सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं थी, बल्कि पूरे देश खासकर दक्षिण भारत और युवा वर्ग में विजय के नाम को लेकर एक अंडरकरंट चल रहा है.

विजय की लगातार बढ़ती पॉपुलैरिटी!

कहानी सिर्फ पीएम उम्मीदवार की पसंद तक नहीं रुकती. एक और दिलचस्प मुकाबला तब दिखा, जब सर्वे में सवाल पूछा गया कि 'विपक्ष यानी INDIA गठबंधन को लीड करने के लिए सबसे बेहतर चेहरा कौन है?' इस सवाल के जवाब में कांग्रेस के राहुल गांधी 29% लोगों की पसंद के साथ टॉप पर बने रहे लेकिन 12 परसेंट से ज्यादा लोगों ने थलपति विजय को विपक्ष का सबसे मजबूत चेहरा माना. इसमें हैरान करने वाली बात ये है कि विजय जब पीएम की रेस में तीसरे और इंडिया को लीड करने के मामले में दूसरे नंबर आए तो ढेर सारे रीजनल लीडर ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव उनसे नीचे खिसक गए.

विजय की जीते के पीछे की दो बड़ी वजह

राजनीति के इस सबसे बड़े स्क्रीनप्ले में विजय की जीत के दो बड़े स्तंभ रहे हैं. पहला- 'क्लीन गवर्नेंस' का वादा और भ्रष्टाचार पर सीधा प्रहार. 10 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद विजय ने मंच से घोषणा की थी कि "वह जनता के पैसे का एक रुपया भी गलत इस्तेमाल नहीं होने देंगे". दशकों से भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के आरोपों से घिरी तमिल राजनीति के बीच जनता को यह 'बेदाग और नया' विकल्प बेहद पसंद आया. दूसरा बड़ा कारण रहा जनरेशन-जेड (Gen-Z) और सोशल मीडिया (MyTVK इकोसिस्टम) पर उनकी मजबूत पकड़, जिसने उन्हें देश के युवाओं के बीच एक बड़ा यूथ आइकॉन बना दिया है.

लब्बोलुआब यह है कि तमिलनाडु के लोगों ने जो मांग उठाई थी, उसे आज देश के मिजाज ने अपनी स्वीकृति दे दी है. सिनेमा के चरम पर रहते हुए एक्टिंग को पूरी तरह अलविदा कहकर राजनीति में आने का विजय का फैसला सही साबित होता दिख रहा है. आगे आने वाले समय में ये सवाल 2029 तक चलेगा कि क्या भ्रष्टाचार-मुक्त राजनीति का संकल्प लेकर निकले थलपति विजय साल 2029 में गेम चेंजर साबित होंगे? क्या दक्षिण का यह मुख्यमंत्री दिल्ली के तख्त की दूरी को पाट पाएगा?

क्या है विजय का आगे का प्लान?

ग्राउंड पर जीरो सांसदों वाली पार्टी, फिर दिल्ली के दंगल में इतनी बड़ी धमक कैसे? सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस तमिलगा वेट्ट्री कज़गम (TVK) का लोकसभा में अभी एक भी सांसद नहीं है और जो पूरी तरह एक क्षेत्रीय दल है, वह दिल्ली और देश की राजनीति में प्रधानमंत्री पद की रेस में कैसे खड़ी हो सकती है? ये भी अभी साफ नहीं है कि विजय तमिलनाडु से बाहर की राजनीति के बारे में क्या सोच रहे हैं. टीवीके दक्षिण के कुछ राज्यों में पॉलिटिकल एक्टिविटी तो कर रही है लेकिन विजय ने दिल्ली की राजनीति को लेकर कोई हिंट नहीं दिया. जब उनके पास पहले टीवीके सांसद को राज्यसभा भेजने का मौका आया तब भी उन्होंने वो सीट कांग्रेस के प्रवीण चक्रवर्ती को दोस्ती के नाते दे दी. टीवीके और कांग्रेस अलायंस पार्टी हैं. विजय और राहुल गांधी की शानदार दोस्ती है लेकिन उन्होंने अभी तक इंडिया अलायंस में शामिल होने पर भी कुछ कहा नहीं है.

क्या विजय बनेंगे किंग?

वैसे राजनीति का इतिहास गवाह है कि जब देश में गठबंधन सरकार या 'हंग पार्लियामेंट' की स्थिति बनती है, तब राष्ट्रीय नहीं बल्कि मजबूत क्षेत्रीय चेहरे ही किंगमेकर या किंग बनकर उभरते हैं. देश का इतिहास एच.डी. देवेगौड़ा और इंद्रकुमार गुजराल जैसे प्रधानमंत्रियों का गवाह रहा है, जो बिना किसी बड़ी राष्ट्रीय पार्टी के भी केंद्र की सत्ता के शीर्ष तक पहुंचे.

अगर साल 2029 के आम चुनाव में विपक्ष को केंद्र में सरकार बनाने का मौका मिलता है, और विजय के पास तमिलनाडु की सीटों का एक बड़ा मजबूत ब्लॉक होता है, तो उनकी 'क्लीन इमेज' और भ्रष्टाचार-मुक्त शासन का संकल्प उन्हें ममता बनर्जी या अखिलेश यादव जैसे विवादित या पुराने चेहरों के मुकाबले पूरे विपक्ष के लिए एक सर्वमान्य, बेदाग और 'डार्क हॉर्स' (छुपा रुस्तम) उम्मीदवार बना सकता है. सी-वोटर के सर्वे ने इसी छिपी हुई संभावना और जनता के 'अंडरकरंट' को समय से पहले पकड़कर दुनिया के सामने रख दिया है.

यहां देखें वीडियो

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