Sourav Ganguly: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान Sourav Ganguly आज अपना 54वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनका जन्म 8 जुलाई 1972 को Kolkata में हुआ था। गांगुली सिर्फ एक सफल कप्तान ही नहीं रहे, बल्कि ऐसे नेता भी थे जिन्होंने कई युवा खिलाड़ियों की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें आगे बढ़ने का मौका दिया।
यही वजह है कि उन्हें भारतीय क्रिकेट में नई सोच और नए दौर की शुरुआत करने वाले कप्तानों में गिना जाता है।
सौरव गांगुली की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह खिलाड़ियों की क्षमता को जल्दी पहचान लेते थे। उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए, जिन्होंने आगे चलकर भारतीय क्रिकेट का भविष्य बदल दिया। उनके नेतृत्व में कई युवा खिलाड़ियों को मौका मिला और वही खिलाड़ी बाद में टीम इंडिया की जीत की मजबूत नींव बने।
अपने करियर की शुरुआत में Virender Sehwag मध्यक्रम में बल्लेबाजी करते थे और जरूरत पड़ने पर ऑफ स्पिन गेंदबाजी भी करते थे। गांगुली ने उनकी आक्रामक बल्लेबाजी को देखते हुए उन्हें ओपनिंग की जिम्मेदारी दी। यह फैसला पूरी तरह सफल साबित हुआ। इसके बाद सहवाग दुनिया के सबसे खतरनाक सलामी बल्लेबाजों में शामिल हो गए। उन्होंने टेस्ट और वनडे दोनों में कई यादगार पारियां खेलीं और भारत को कई बड़ी जीत दिलाईं।
Mahendra Singh Dhoni ने दिसंबर 2004 में अपना वनडे डेब्यू किया था। शुरुआती चार मैचों में उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। ऐसे में माना जा रहा था कि उन्हें टीम से बाहर किया जा सकता है। लेकिन सौरव गांगुली ने उन पर भरोसा बनाए रखा।
पाकिस्तान के खिलाफ विशाखापट्टनम में खेले गए पांचवें वनडे में गांगुली ने बड़ा फैसला लेते हुए धोनी को तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए भेजा। धोनी ने इस मौके का पूरा फायदा उठाया और सिर्फ 123 गेंदों में 148 रनों की शानदार पारी खेल दी। इस पारी में उन्होंने 15 चौके और 4 छक्के लगाए। इसके बाद धोनी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और आगे चलकर भारत के सबसे सफल कप्तानों में शामिल हुए।
गांगुली ने सिर्फ सहवाग और धोनी ही नहीं, बल्कि Harbhajan Singh, Yuvraj Singh और Zaheer Khan जैसे खिलाड़ियों पर भी भरोसा जताया। बाद में यही खिलाड़ी भारतीय टीम की सबसे बड़ी ताकत बने। इन खिलाड़ियों ने मिलकर भारत को कई यादगार जीत दिलाईं और आगे चलकर 2011 में विश्व कप जीतने वाली टीम का भी अहम हिस्सा रहे।

