Temple Cleaning Rules: हिंदू धर्म में घर का मंदिर सबसे पवित्र स्थान माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि भगवान का निवास भी माना जाता है। इसलिए मंदिर की नियमित सफाई और पवित्रता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया है।
मान्यता है कि साफ-सुथरा मंदिर घर में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक वातावरण बनाए रखने में सहायक होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंदिर की सफाई ब्रह्म मुहूर्त समाप्त होने के बाद, स्नान करने और पूजा शुरू करने से पहले करनी चाहिए। सुबह उषाकाल में मंदिर की सफाई को शुभ माना जाता है। इसके बाद भगवान का स्नान, दीप प्रज्वलित करना, पुष्प अर्पित करना और पूजा करना उत्तम माना जाता है।
मान्यताओं के अनुसार शाम या रात के समय मंदिर की गहरी सफाई, झाड़ू-पोंछा या सजावट में बड़े बदलाव करने से बचना चाहिए। हालांकि, शाम की आरती से पहले साफ कपड़े से मंदिर की हल्की सफाई करना उचित माना जाता है। इसके बाद दीपक जलाकर नियमित पूजा की जा सकती है।
मंदिर की सफाई से पहले हाथ-पैर अच्छी तरह धोएं। यदि संभव हो तो स्नान के बाद ही मंदिर की सफाई करें। सफाई पूरी होने के बाद गंगाजल का हल्का छिड़काव करना शुभ माना जाता है। इससे स्थान की पवित्रता बढ़ने की मान्यता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रोजाना हल्की सफाई की जा सकती है, लेकिन विस्तृत और गहरी सफाई के लिए शनिवार का दिन शुभ माना जाता है। वहीं कुछ मान्यताओं में गुरुवार और एकादशी के दिन मंदिर की बड़ी सफाई से बचने की सलाह दी जाती है।

