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अकाल मृत्‍यु से बचने के लिए विकास दुबे ने किया था ये उपाय

नई दिल्‍ली: विकास दुबे का खेल अब खत्म हो चुका है, लेकिन उसकी कहानियों का सिलसिला लगातार जारी है। धर्म-कर्म में विश्वास रखने वाला विकास दुबे अकाल मृत्यु से बचने के लिए एक चमत्कारिक गुरु के कहने पर दाएं हाथ में जीवनरक्षक दुर्गा कवच डाला था। ये अलग मामला है कि जब उसके पाप का घड़ा भरा तो जीवन रक्षक कवच भी काम नहीं आया।

विकास दुबे को पूजा-पाठ और जीवन रक्षक कवच में बहुत ज्य़ादा विश्वास था। यूपी पुलिस के 8 जवानों की हत्या के बाद कानपुर से भागा हुआ विकास दुबे जब मिला और जहां मिला तो वो स्थान भी था उज्जैन का महाकाल मंदिर। इतना ही नहीं विकास हर साल महाकाल के दरबार में जाता था। इसी तरह से खुद को अकाल मृत्यु से बचाने के लिए विकास दुबे ने जीवनरक्षक दुर्गा कवच पर भी बहुत विश्वास किया था। कहते हैं कि इस कवच को लेकर विकास के मन में इतना ज्य़ादा विश्वास था कि इसके लिए उसने शरीर में ऑपरेशन तक करवा लिए थे।

दर्जन भर से ज्यादा हत्याओं का आरोपी विकास दुबे अकाल मृत्यु से डरता था। उसे लगता था कि शरीर में जब तक जीवनरक्षक दुर्गा कवच रहेगा, उसे कोई कुछ नहीं कर पाएगा। शायद इसी भूल में विकास दुबे अपराध की दुनिया में हर दिन एक नया अध्याय लिखने लगा। 2001 के अक्टूबर महीने में विकास दुबे ने बीजेपी के नेता संतोष शुक्ला की हत्या की और उसके बाद से उसे हर पल अपनी जान पर खतरा महसूस होने लगा था। कहते हैं कि इसी के बाद किसी के कहने पर विकास दुबे ने शोभन सरकार से संपर्क किया और अपनी परेशानी बताकर विकास ने शरीर में जीवनरक्षक दुर्गा कवच पहन लिया। इसी मुलाकात के बाद विकास दुबे ना सिर्फ शरीर में जीवनरक्षक दुर्गा कवच पहनने लगा बल्कि शोभन सरकार का भक्त भी बन गया।

2003 में जैसे ही विकास ने इस कवच को शरीर में डलवाया, उसके बाद से उसके मन से मौत का खौफ खत्म हो गया। उसे लगने लगा था कि अब उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। विकास के करीबी भी बताते हैं कि जीवनरक्षक दुर्गा कवच पहनने के बाद विकास दुबे अपराध की दुनिया में काफी तेजी से बढ़ने लगा और इसी जीवनरक्षक दुर्गा कवच ने उसके भीतर से खौफ को खत्म कर दिया था। खुद को शिवभक्त बताने वाला विकास दुबे भगवान शिव की पूजा में बहुत ज्यादा विश्वास रखता था। हर दिन विकास पूजा-पाठ में वक्त देता था, लेकिन दूसरी तरफ उसके पाप का घड़ा भी बढ़ता जा रहा था।

कहते हैं कि अपराधी कितना भी बड़ा क्यों न हो, एक दिन उसके अपराध का अंत तय है। वही हुआ भी, जिस विकास दुबे के इशारे पर कानपुर के आसपास और खासकर चौबेपुर में पत्ता-पत्ता हिलता था। उसी विकास दुबे का अंत इतना बुरा हुआ, जिसकी कल्पना उसने खुद भी नहीं की होगी। जिस अकाल मृत्यु से बचने के लिए उसने शरीर में जीवनरक्षक दुर्गा कवच पहने थे, वो भी काम नहीं आए। आखिर में यूपी पुलिस के 8 जवानों की हत्या का आरोपी विकास दुबे उज्जैन से कानपुर लाते वक्त पुलिस एनकाउंटर में मारा गया।

Dailyhunt
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