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MP: देश का पहला अनोखा हाईवे हुआ पूरी तरह बनकर तैयार, परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने किया वर्चुअली उद्धघाटन

सिवनी। सिवनी जिले से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर एनएचएआई द्वारा हाल ही में एक ऐसे अनोखे हाईवे का निर्माण पूर्ण किया गया है। जो अपने आप में इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना साबित हो रहा है। 16 सितंबर 2021 के दिन केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने वर्चुअल उद्धघाटन कर देश की जनता के उपयोग के लिए यह हाइवे हैंड ओवर कर दिया गया है। हवा पर झूलता नजर आने वाला यह एलिवेटेड हाईवे वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिहाज से पहले और अनोखे मॉडल के रूप में पूरे विश्व में देश की अलग पहचान को गढ़ रहा है।

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पिछले 10 साल से मोहगांव से खवासा के बीच राष्टीय राजमार्ग के 29 किमी हिस्से का निर्माण अवरुद्ध पड़ा हुआ था। पेंच टाइगर रिजर्व के बफर एरिया और वन्य जीवों की सुरक्षा कारणों की वजह से इस राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में रुकावट आ रही थी। मौजूदा सरकार ने वक्त की मांग और इस हिस्से में वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखा है। सरकार ने तमाम अड़चनों को दूर करते हुए पुरानी सड़क को फोरलेन में बदलने का नया प्लान तैयार किया।

पेंच और कान्हा टाइगर रिजर्व के कोरीडोर को जोड़ता है यह रास्ता

आपको बता दें वर्षों से इस हाईवे के दरमियान जंगल का प्राकृतिक रास्ता है। यह प्राकृतिक रास्ता पेंच टाइगर रिजर्व और कान्हा टाइगर रिजर्व के कोरिडोर को जोड़ता है। यह हाईवे इसी कोरिडोर को क्रॉस करते हुए बीच से होकर गुजरता है। आज भी वन्य जीव आवाजाही के लिए इस कोरिडोर का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए वन विभाग ने वन्य जीवों की सुरक्षा की शर्तो पर कॉरिडोर को क्रॉस करने वाले सड़क निर्माण की अनुमति दी गई थी।

वन्यजीवों के लिए सड़क के नीचे से बना है रास्ता

इसलिए पहले के प्रोजेक्ट मे बड़े बदलाव किए गए और 950 करोड़ राशि लागत से इस प्रोजेक्ट को और भी हाइटेक स्वरूप दिया गया। मौजूदा निर्माण अंतर्गत वन्यजीवों के सड़क पार करने के लिए राजमार्ग के 3.5 किलोमीटर हिस्से में 14 ऐनिमल अंडर पास का निर्माण किया गया है। साथ ही पानी निकासी के लिए 58 कलवर्ट (पुलिया) में से 18 ऐनिमल क्रॉसिंग कलवर्ट बनाए गए हैं। जिससे वन्यजीव सड़क के नीचे से आसानी से सड़क पार कर रहे हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक रास्ता बनाए रखने का इंतजाम हाईवे में किया गया है।

प्रदेश के वन विभाग, एनटीसीए, डब्ल्यूआईआई एवं पेंच टाइगर रिजर्व के संयुक्त निरीक्षण के बाद वन्यप्राणियों की आवाजाही के लिए चिह्नित प्राकृतिक रास्ते पर ऐनिमल अंडर पास बनाने का सुझाव एनएचएआई को दिया गया था। करीब 5 मीटर ऊंचे ऐनिमल अंडर पास के ऊपरी हिस्से से वाहन निकल रहे हैं और निचले हिस्से से वन्यप्राणियों की आवाजाही हो रही है। वन्यक्षेत्र की 21.69 किलोमीटर एलिवेटेड फोरलेन सड़क एवं अंडरपास के दोनों किनारों पर साउंड बैरियर और हेडलाइट रिड्यूजर लगाकर लगभग 4 मीटर स्टील की ऊंची दीवार तैयार की गई है।

लाइट और साउंड प्रूफ हाईवे का है ये मॉडल

इस दीवार की वजह से भारी वाहनों के हेडलाइट की तेज रोशनी व शोरगुल का जंगल तक पहुंच पाना मुश्किल है। यही नहि ट्रेफिक का असर वन्य प्राणियों पर भी नहीं पड़ रहा। इसके अलावा किसी भी तरह कि विसंगति से निपटने के संभावित जगहों पर निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गये हैं। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद यह हाईवे वन्य प्राणियों कि सुरक्षा के लिहाज से देश का पहला हाईवे बन गया है। जिसकी चर्चा देश और विदेशों में भी हो रही है।

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