बिहार सरकार ने आंगनवाड़ी केंद्रों के जरिए मिलने वाले टेक होम राशन की व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए वर्षों से चली आ रही पुरानी प्रणाली पर विराम लगा दिया है। अब लाभार्थियों को पहले की तरह केवल सूखा राशन नहीं मिलेगा, बल्कि उसकी जगह रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-इट पौष्टिक प्रीमिक्स खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।
सरकार का दावा है कि इस नई व्यवस्था से न सिर्फ बच्चों और महिलाओं को बेहतर पोषण मिलेगा, बल्कि राशन वितरण में होने वाली कथित गड़बड़ियों और हकमारी पर भी लगाम लगेगी।
नई व्यवस्था सुपौल समेत बिहार के सभी जिलों में लागू की जा रही है। इसका लाभ छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को मिलेगा। समाज कल्याण विभाग का उद्देश्य इन सभी वर्गों तक संतुलित, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पोषण पहुंचाकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को मजबूत बनाना है।
सरकार ने टेक होम राशन की आपूर्ति की जिम्मेदारी बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (कॉन्फेड) को सौंपी है। अब लाभार्थियों को न्यूट्री राइस खिचड़ी प्रीमिक्स, न्यूट्री पुलाव, फोर्टिफाइड मूंग दाल-चावल खिचड़ी, मल्टीमिक्स अनाज एवं प्रोटीन प्रीमिक्स तथा फोर्टिफाइड नमकीन दलिया जैसी पौष्टिक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। पंजीकृत लाभार्थियों की संख्या के अनुसार यह सामग्री संबंधित आंगनवाड़ी केंद्रों तक पहुंचाई जाएगी।समाज कल्याण विभाग का मानना है कि इस बदलाव से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को नई रफ्तार मिलेगी, जबकि गर्भवती और धात्री महिलाओं को आवश्यक पोषक तत्व मिलने से मातृ एवं शिशु कुपोषण में कमी आएगी।
दरअसल, वर्षों से टेक होम राशन के वितरण में अनियमितता, कटौती और हकमारी के आरोप लगते रहे हैं। लाभार्थियों का कहना था कि निर्धारित मेन्यू के बजाय कई केंद्रों पर केवल चावल, दाल और सोयाबीन देकर खानापूर्ति कर दी जाती थी, जबकि नियमों के मुताबिक खाद्य तेल, मसाले और नमक समेत अन्य आवश्यक सामग्री भी दी जानी चाहिए। नई प्रीमिक्स व्यवस्था लागू होने के बाद वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने, मनमानी पर रोक लगने और तय पोषण सामग्री सीधे लाभार्थियों तक पूरी मात्रा में पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।

