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Bankipur Bypoll : महामाया प्रसाद से नितिन नवीन तक, जानिए क्यों हमेशा इतिहास रचती रही है पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट

Bankipur Bypoll : महामाया प्रसाद से नितिन नवीन तक, जानिए क्यों हमेशा इतिहास रचती रही है पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में बांकीपुर सीट से जीत दर्ज करने वाले नितिन नवीन के भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने और राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई बांकीपुर सीट पर उपचुनाव हो रहे हैं।

30 जुलाई को मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब चुनावी सरगर्मियां चरम पर हैं। इस बार चुनावी मैदान में भाजपा से नीरज कुमार सिन्हा, राजद से रेखा गुप्ता और जन सुराज से प्रशांत किशोर की साख दांव पर लगी है, जिससे यह मुकाबला बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय बन चुका है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बांकीपुर (पूर्व में पटना पश्चिम) विधानसभा क्षेत्र का इतिहास हमेशा से बड़े नेताओं को गढ़ने और राज्य की राजनीति की दिशा तय करने का रहा है। इसी सीट से चुनाव जीतकर केबी सहाय 1962 में बिहार के मुख्यमंत्री बने थे। वहीं, 1967 में राज्य की पहली गैर-कांग्रेसी सरकार के मुख्यमंत्री बने महामाया प्रसाद ने भी इसी ऐतिहासिक सीट से जीत हासिल कर इतिहास रचा था।

इसके बाद बिहार में भाजपा के संस्थापक स्तंभों में शामिल ठाकुर प्रसाद ने 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर यहीं से चुनाव जीता था। उनके पुत्र रविशंकर प्रसाद वर्तमान में पटना साहिब से लोकसभा सांसद हैं और केंद्र सरकार में वरिष्ठ मंत्री रह चुके हैं। साल 1995 में भाजपा के नवीन सिन्हा ने यहां से जीत दर्ज की, जिसके बाद से यह विधानसभा सीट भारतीय जनता पार्टी का अजेय किला मानी जाती रही है।

साल 2006 से नवीन सिन्हा के बेटे नितिन नवीन लगातार बांकीपुर से विधायक चुने जाते रहे और राज्य सरकार में कई बार मंत्री पद संभाला। महज 45 वर्ष की उम्र में भारतीय जनता पार्टी के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने वाले नितिन नवीन की इस उपलब्धि ने बांकीपुर के राजनीतिक कद को राष्ट्रीय स्तर पर और बढ़ा दिया है। भारतीय जनता पार्टी की कुल आयु के बराबर ही उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष की उम्र होना भी अपने आप में एक अनोखा रिकॉर्ड है।

ऐतिहासिक रूप से यह साबित रहा है कि बांकीपुर की सरजमीं पर जो नेता अपनी सियासी जमीन मजबूत करते हैं, वे राजनीति के पन्नों में नया इतिहास रचते हैं। ऐसे में अब देखना बेहद दिलचस्प होगा कि आगामी 3 अगस्त को जब मतों की गिनती होगी, तो बांकीपुर की जनता किसे अपना जनादेश देकर नया इतिहास रचती है और किसे चुनावी पटखनी का सामना करना पड़ता है।

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