आरा के भोजपुर जिला में युवक भरत तिवारी की पुलिस एनकाउंटर में मौत के बाद मामला लगातार गरमाता जा रहा है। शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी भरत तिवारी की मौत को लेकर परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
परिवार का आरोप है कि भरत तिवारी ने सरेंडर कर दिया था और अपना हथियार भी फेंक दिया था, इसके बावजूद साजिश के तहत उन्हें गोली मार दी गई।
परिजनों का कहना है कि यह पुलिस एनकाउंटर नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या है। इसी आरोप को लेकर अब विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। भरत तिवारी को न्याय दिलाने और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर स्पीड ट्रायल के जरिए सख्त सजा दिलाने की मांग को लेकर सैकड़ों युवाओं ने आरा शहर में कैंडल मार्च निकाला।
यह कैंडल मार्च शहर के कतीरा चौक से शुरू हुआ। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मार्च शहर के कई प्रमुख चौक-चौराहों से गुजरता हुआ आरा रेलवे स्टेशन पहुंचा, जहां भरत तिवारी को श्रद्धांजलि दी गई और कार्यक्रम का समापन हुआ। कैंडल मार्च का नेतृत्व कर रहे मोनू सिंह ने कहा कि यह कोई मुठभेड़ नहीं बल्कि हत्या है। उनका आरोप है कि भरत तिवारी को जानबूझकर निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि समाज के लिए आवाज उठाने वाले एक युवक की हत्या कर दी गई, जो पूरी तरह गलत और अन्यायपूर्ण है।
प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि जब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलता, दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं होती और भरत तिवारी को शहीद का दर्जा नहीं दिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि यह लड़ाई न्याय मिलने तक चलती रहेगी। फिलहाल इस मामले को लेकर इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और लोगों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।

