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Bihar CO Transfer: बिहार में  CO के बड़े पैमाने पर तबादले, जमीन माफियाओं पर होगा डिजिटल स्ट्राइक!अब एक क्लिक में पकड़ी जाएगी सरकारी जमीन की हेराफेरी

Bihar CO Transfer: बिहार में CO के बड़े पैमाने पर तबादले, जमीन माफियाओं पर होगा डिजिटल स्ट्राइक!अब एक क्लिक में पकड़ी जाएगी सरकारी जमीन की हेराफेरी

बिहार में जमीन विवाद, अवैध कब्जे और सरकारी भूमि की हेराफेरी पर लगाम कसने के लिए सरकार ने एक साथ दो बड़े कदम उठाए हैं। एक ओर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने अंचल अधिकारियों और राजस्व अधिकारियों के स्तर पर व्यापक प्रशासनिक फेरबदल किया है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी जमीनों की पहचान और निगरानी के लिए डिजिटल अभियान को तेज कर दिया गया है।

इन दोनों फैसलों को राज्य में भूमि प्रशासन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार बिहार राजस्व सेवा के कई अधिकारियों का तबादला किया गया है और सात अंचलों में नए अंचल अधिकारियों की तैनाती की गई है। वहीं तीन अंचल अधिकारियों को मुख्यालय में पदस्थापन की प्रतीक्षा में रखा गया है। मयंक आशुतोष आनंद (कदवा, कटिहार), अश्विनी कुमार (बेनीपुर, दरभंगा) और उमा शंकर (बेतिया सदर) को उनके वर्तमान पद से हटाकर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।

सरकार ने सभी जिलाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि स्थानांतरित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किया जाए ताकि वे एक सप्ताह के भीतर अपने नए पदस्थापन स्थल पर योगदान दे सकें। प्रशासनिक हलकों में इस फेरबदल को राजस्व व्यवस्था में तेजी लाने और लंबित मामलों के निपटारे की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

इसी बीच सरकारी जमीनों की सुरक्षा को लेकर भी बड़ा डिजिटल अभियान शुरू किया गया है। बिहार सर्वेक्षण कार्यालय की उप निदेशक मोना झा ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर निर्देश दिया है कि सरकारी भूमि से जुड़ी सभी जमाबंदियों को ऑनलाइन चिह्नित कर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाए।

अब बिहारभूमि पोर्टल के ई-जमाबंदी मॉड्यूल में विशेष व्यवस्था की गई है, जिसके जरिए अंचल अधिकारी अपने लॉगिन आईडी से यह पता लगा सकेंगे कि उनके क्षेत्र में कौन-कौन सी जमीन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है। अधिकारी 'सर्च गवर्नमेंट लैंड' विकल्प का उपयोग कर जिला, अंचल, हल्का, मौजा और जमाबंदी का चयन करेंगे। इसके बाद संबंधित गांव की सरकारी जमीनों और उनसे जुड़ी जमाबंदियों की पूरी सूची स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाएगी।

इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा आम लोगों को मिलने की उम्मीद है। सरकारी जमीनों का रिकॉर्ड ऑनलाइन और स्पष्ट रूप से उपलब्ध होने पर भू-माफियाओं के लिए फर्जीवाड़ा करना मुश्किल हो जाएगा। साथ ही सरकारी भूमि को निजी बताकर बेचने या उस पर अवैध कब्जा करने की कोशिशों पर भी प्रभावी रोक लग सकेगी।

राजस्व विभाग को उम्मीद है कि प्रशासनिक फेरबदल और डिजिटल निगरानी की इस दोहरी रणनीति से भूमि विवादों में कमी आएगी, सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा मजबूत होगी और जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता का नया दौर शुरू होगा।

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