गया कोंच प्रखंड के बिजहरा गांव में मंगलवार देर रात करीब 11 बजे कुदरत ने ऐसा कहर बरपाया कि प्राचीन सूर्य मंदिर का गुंबद आकाशीय बिजली की चपेट में आ गया। बिजली गिरने की जोरदार आवाज से पूरा इलाका दहल उठा और आसपास के घरों में अफरा-तफरी मच गई।
हादसे में मंदिर के गुंबद का एक हिस्सा टूटकर क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि मंदिर में बसेरा कर रहे दर्जनों कबूतरों की मौत हो गई।
आकाशीय बिजली गिरने की तेज गर्जना सुनकर ग्रामीण सहम गए। रात होने के कारण तत्काल मंदिर तक पहुंचना संभव नहीं हुआ। बुधवार सुबह ग्रामीण मंदिर पहुंचे और वहां का मंजर देखकर सकते में रह गए। गुंबद का क्षतिग्रस्त हिस्सा हादसे की भयावहता बयां कर रहा था, जबकि मंदिर परिसर में कई कबूतर मृत पाए गए।
ग्रामीणों का कहना है कि यह सूर्य मंदिर काफी पुराना है और लंबे अरसे से आसपास के लोगों की आस्था और श्रद्धा का केंद्र रहा है। ऐसे में मंदिर के गुंबद का क्षतिग्रस्त होना महज एक हादसा नहीं, बल्कि गांव की धार्मिक धरोहर को पहुंचा नुकसान है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल स्थल का निरीक्षण कराकर मंदिर के जीर्णोद्धार और संरक्षण की दिशा में ठोस पहल करने की मांग की है।ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते मंदिर की मरम्मत और संरक्षण नहीं किया गया तो बारिश के इस मौसम में क्षतिग्रस्त हिस्सा और कमजोर हो सकता है। लिहाजा प्रशासन को पुरातन धरोहर की हिफाजत के लिए सरकारी सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।
इधर, लगातार हो रही बारिश ने गांव की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। बिजहरा के समीप स्थित बड़ा तालाब लबालब भर गया है, जिसके कारण आसपास जलजमाव की स्थिति पैदा हो गई है। खेतों में भी पानी भरने लगा है। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। किसानों को आशंका है कि यदि पानी लंबे समय तक खेतों में जमा रहा तो धान की फसल को नुकसान हो सकता है।ग्रामीण जय प्रकाश यादव, अनिल यादव, सुनील यादव, सियाराम यादव, निरंजन शर्मा, सूर्यदयाल यादव और भास्कर यादव ने प्रशासन से प्राचीन सूर्य मंदिर के संरक्षण, जीर्णोद्धार और मरम्मत के लिए सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द कदम उठाए, ताकि गांव की इस धार्मिक धरोहर को महफूज रखा जा सके।

