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Bihar Politics: खरमास के बाद बिहार में होगा सत्ता परिवर्तन , नीतीश के इस्तीफा का दिन तय! नए सीएम को लेकर  NDA में मंथन तेज, सम्राट चौधरी के साथ ये नाम सबसे आगे

Bihar Politics: खरमास के बाद बिहार में होगा सत्ता परिवर्तन , नीतीश के इस्तीफा का दिन तय! नए सीएम को लेकर NDA में मंथन तेज, सम्राट चौधरी के साथ ये नाम सबसे आगे

बिहार की सियासत इस वक़्त एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रही है, जहां हर दिन नए समीकरण बन रहे हैं और पुराने ढांचे दरकते नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित इस्तीफे और नई सरकार के गठन को लेकर सियासी गलियारों में हलचल अपने चरम पर है।

खबर है कि 10 अप्रैल को दिल्ली में वह राज्यसभा सांसद के तौर पर शपथ लेंगे, जिसके बाद पटना लौटते ही सत्ता परिवर्तन की पटकथा तेज़ी से आगे बढ़ेगी।

सूत्रों की मानें तो दिल्ली में भाजपा की हाई लेवल मीटिंग में बिहार के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लग सकती है। यह बैठक महज़ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि बिहार की सियासत का नया चेहरा तय करने वाली अहम कड़ी मानी जा रही है। इसके बाद पटना में एनडीए विधायक दल की बैठक बुलाई जाएगी, जहां नए नेता का चुनाव होगा और फिर नीतीश कुमार अपने पद से इस्तीफा पेश कर सकते हैं।

12 अप्रैल को प्रस्तावित विधायक दल की बैठक को बेहद अहम बताया जा रहा है। यही वह मंच होगा जहां सत्ता के अगले वारिस का ऐलान हो सकता है। कयास लगाए जा रहे हैं कि खरमास खत्म होने के बाद 15 अप्रैल को नई सरकार शपथ ले सकती है, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत भाजपा के कई दिग्गज शामिल हो सकते हैं।

मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए सबसे मजबूत दावेदार के तौर पर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है। उनकी सियासी सक्रियता और बयानों ने इस अटकल को और हवा दी है। वहीं दूसरे उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने खुद को इस रेस से बाहर बताकर सस्पेंस को और गहरा कर दिया है।

इसी बीच दीघा विधायक संजीव चौरसिया का नाम भी अचानक चर्चा में आ गया है। रामनवमी के दौरान भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से उनकी मुलाकात और दिल्ली दौरे ने यह संकेत दिया है कि सियासत के पर्दे के पीछे कोई बड़ा खेल चल रहा है। अंदरखाने यह भी कहा जा रहा है कि उन्हें संघ की पसंद के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि आधिकारिक तौर पर कोई भी कुछ कहने से गुरेज़ कर रहा है।

करीब दो दशकों तक बिहार की सियासत पर अपनी पकड़ बनाए रखने वाले नीतीश कुमार ने हाल ही में विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देकर इस बदलाव के संकेत दे दिए थे। अब सवाल यह है कि क्या यह बदलाव महज़ चेहरा बदलने तक सीमित रहेगा या बिहार की सियासत में कोई नया दौर शुरू होगा। फिलहाल, लोगों की निगाहें दिल्ली और पटना के बीच चल रही इस सियासी बाज़ी पर टिकी हैं जहां हर चाल के साथ सत्ता का संतुलन बदलता नजर आ रहा है।

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