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Bihar Politics: वादे बड़े, भुगतान किस्तों में!बिहार के खजाने पर सवाल, वेतन-पेंशन से योजनाओं तक क्यों अटकी रकम?पढ़िए

Bihar Politics: वादे बड़े, भुगतान किस्तों में!बिहार के खजाने पर सवाल, वेतन-पेंशन से योजनाओं तक क्यों अटकी रकम?पढ़िए

बिहार की सियासत में इन दिनों सिर्फ बयानबाजी नहीं, बल्कि सरकारी खजाने और खर्च के तौर-तरीके भी बहस का बड़ा मुद्दा बनते जा रहे हैं। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड से लेकर कर्मचारियों के इंक्रीमेंट, जीविका दीदियों की किस्त, पेंशन, वेतन और विकास योजनाओं तक भुगतान को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

विपक्ष इसे सरकार की वित्तीय परेशानी से जोड़ रहा है, जबकि सरकार की तरफ से अलग-अलग योजनाओं और भुगतान को लेकर सफाई दी जा रही है। सबसे पहले स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना ने सियासी तापमान बढ़ाया। अगस्त में योजना के तहत कर्ज देने के तौर-तरीके में बदलाव की खबर सामने आई। नए ढांचे में बिहार स्टेट एजुकेशन फाइनेंस कॉरपोरेशन से ₹2 लाख तक और ₹2 लाख से ₹4 लाख तक की राशि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के जरिए उपलब्ध कराने की बात सामने आई।मामले ने तूल पकड़ा तो मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 24 अगस्त को साफ किया कि उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को पहले की तरह ₹4 लाख तक का स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड मिलता रहेगा। यानी सरकार ने अधिकतम कर्ज सीमा घटने की आशंका को खारिज कर दिया।लेकिन सियासी सवाल यहीं खत्म नहीं होते।

सरकार के सामने अब वेतन और पेंशन के भुगतान का मुद्दा भी है। दिए गए विवरण के मुताबिक वित्त विभाग ने बजट 2026-27 की राशि से वेतन मद में किस्तों के जरिए राशि जारी की है। विश्वविद्यालयों के टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ के लंबित वेतन-पेंशन भुगतान को लेकर भी अलग-अलग चरणों में राशि जारी होने की बात सामने आई है।सरकारी बजट दस्तावेज में 2026-27 के लिए पेंशन मद में ₹35,170.48 करोड़ और शिक्षा विभाग के स्थापना व प्रतिबद्ध व्यय के लिए ₹41,853.13 करोड़ का प्रावधान दर्ज है। ऐसे में सवाल यह है कि बजट में प्रावधान होने के बावजूद भुगतान को चरणबद्ध करने की जरूरत क्यों पड़ रही है?

ग्रामीण बिहार की महिलाओं से जुड़ी जीविका योजना भी इस बहस के केंद्र में है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक 7वें चरण में 4 लाख जीविका दीदियों को ₹10-10 हजार की पहली सहायता मिली। दूसरी किस्त के तौर पर ₹20 हजार देने की प्रक्रिया में भी लंबा अंतराल देखने को मिला।सरकार ने 27 अगस्त को ₹600 करोड़ जारी किए और करीब एक लाख दीदियों को दूसरी किस्त के रूप में ₹20-20 हजार दिए जाने की बात सामने आई। अब विपक्ष के सामने सवाल यह है कि वादे और भुगतान के बीच इतना फासला क्यों?

बिहार में ठेके पर बहाल डेटा एंट्री ऑपरेटरों के सालाना 10 फीसदी इंक्रीमेंट को लेकर भी नाराजगी सामने आई है। बिहार राज्य डेटा एंट्री ऑपरेटर संघ ने वित्त विभाग के मंत्री को पत्र देकर इंक्रीमेंट लागू करने की मांग की है। संघ का दावा है कि मुख्यमंत्री सचिवालय से लेकर पंचायतों तक 20 हजार से अधिक ऑपरेटर काम कर रहे हैं।अगर यह मामला लंबा खिंचता है तो सरकार के सामने कर्मचारियों की नाराजगी संभालने की चुनौती बढ़ सकती है।

विधायक मद से जुड़ी योजनाओं को लेकर भी दिए गए विवरण में भुगतान और स्वीकृति में देरी का जिक्र है। सत्ता पक्ष के विधायकों को भी राशि जारी होने का इंतजार करने की बात कही जा रही है। इससे सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो सकती है कि सरकार विकास योजनाओं में भी फंड फ्लो को बेहद नाप-तौलकर चला रही है।पथ निर्माण विभाग के बड़े प्रोजेक्ट्स में भी राशि धीरे-धीरे जारी किए जाने का दावा किया गया है। जून में अलग-अलग प्लान हेड के तहत करोड़ों रुपये जारी हुए, लेकिन भुगतान की रफ्तार को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना के तहत पात्र बेरोजगार युवाओं को अधिकतम 24 महीने तक हर महीने ₹1,000 देने का प्रावधान है। दिए गए विवरण के मुताबिक भुगतान में देरी की शिकायतें सामने आई हैं। युवाओं के लिए यह रकम नौकरी के आवेदन, यात्रा, इंटरनेट और दूसरे जरूरी खर्चों में छोटी मगर अहम मदद बनती है।

अब असली सियासी सवाल यही है क्या बिहार सरकार वाकई वित्तीय दबाव में है, या भुगतान को चरणबद्ध करना महज प्रशासनिक रणनीति है? बिहार के 2026-27 बजट में बड़े पैमाने पर स्थापना, प्रतिबद्ध व्यय और पेंशन का प्रावधान है। लिहाजा सिर्फ किश्तों में भुगतान को आधार बनाकर वित्तीय संकट का अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा। मगर एक साथ वेतन, पेंशन, इंक्रीमेंट, योजनाओं की राशि और विभिन्न कल्याणकारी भुगतान पर सवाल उठना सरकार के लिए निश्चित तौर पर सियासी इम्तिहान है।आने वाले दिनों में सरकार को सिर्फ खजाने का हिसाब नहीं, बल्कि जनता को यह भरोसा भी दिलाना होगा कि वादे पूरे होंगे, भुगतान रुकेगा नहीं और विकास की रफ्तार पर कोई ब्रेक नहीं लगेगा।

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