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बोधगया में नए आपराधिक कानूनों पर मंथन शुरू, सीएम सम्राट चौधरी ने दो दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन किया उद्घाटन

बोधगया में नए आपराधिक कानूनों पर मंथन शुरू, सीएम सम्राट चौधरी ने दो दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन किया उद्घाटन

जिले के बोधगया स्थित प्रसिद्ध कन्वेंशन सेंटर में नए आपराधिक कानूनों पर आधारित दो दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन का शनिवार को भव्य शुभारंभ हुआ। इस बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दीप प्रज्वलित कर किया।

इस दौरान मंच पर न्यायपालिका और राज्य सरकार के कई शीर्ष अधिकारी भी मौजूद रहे। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य देश में लागू हुए नए कानूनी ढांचे के प्रभावी और सुचारु क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है।

इस दो दिवसीय सम्मेलन के केंद्र में न्यायिक व्यवस्था और पुलिस प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का मुद्दा सबसे अहम है। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि जांच एजेंसियां और अदालतें मिलकर कितनी सटीकता से काम करती हैं। सम्मेलन में दोनों विभागों के बीच के तकनीकी और व्यावहारिक अंतर को पाटने के लिए गंभीर रूप से मंथन किया जा रहा है।

बोधगया में आयोजित इस राज्य स्तरीय समागम में कानूनी और प्रशासनिक जगत के दिग्गजों का महाजुटान हुआ है। सम्मेलन में बिहार के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक (SP), जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा करीब 250 न्यायिक पदाधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश, पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश व अन्य न्यायाधीश, राज्य सरकार के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, अभियोजन (Prosecution) विभाग के पदाधिकारी और देश के जाने-माने कानून विशेषज्ञ भी इस मंथन का हिस्सा बने हैं।

दो दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में नए आपराधिक कानूनों के विविध प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इसके तहत अपराध अनुसंधान (जांच प्रक्रिया), अभियोजन की भूमिका, न्यायिक कार्यप्रणाली की नई रूपरेखा और जमीनी स्तर पर कानूनों के व्यावहारिक क्रियान्वयन से जुड़े संवेदनशील विषयों को शामिल किया गया है। विशेषज्ञ इस बात पर भी प्रकाश डाल रहे हैं कि नए प्रावधानों के तहत डिजिटल साक्ष्यों और नई प्रक्रियाओं को कैसे प्रभावी ढंग से अपनाया जाए।

इस पूरे आयोजन का अंतिम उद्देश्य बिहार की न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध (Time-bound) बनाना है। कानूनविदों का मानना है कि पुलिस, अभियोजन और न्यायपालिका के आपसी तालमेल से मुकदमों के निपटारे में तेजी आएगी और आम जनता का न्याय प्रणाली पर भरोसा और मजबूत होगा। यह सम्मेलन बिहार में नए कानूनों को जमीनी स्तर पर मजबूती से लागू करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

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