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महावीर मंदिर में सावन की तैयारी : चार शिवलिंगों पर रूद्राभिषेक की सुविधा, सभी मंडप होंगे  वातानुकूलित                             रूद्राभिषेक का समय और वातानुकूलित मंडप की सुविधापूजा सामग्री लाने की जरूरत नहीं, मंदिर से ही मिलेगी हर वस्तुश्रावण मास का धार्मिक महत्व और विभिन्न पुराणों में उल्लेखउपासना का विशेष फल, सावन में हर बूंद का महत्व

महावीर मंदिर में सावन की तैयारी : चार शिवलिंगों पर रूद्राभिषेक की सुविधा, सभी मंडप होंगे वातानुकूलित रूद्राभिषेक का समय और वातानुकूलित मंडप की सुविधापूजा सामग्री लाने की जरूरत नहीं, मंदिर से ही मिलेगी हर वस्तुश्रावण मास का धार्मिक महत्व और विभिन्न पुराणों में उल्लेखउपासना का विशेष फल, सावन में हर बूंद का महत्व

स वर्ष सावन का पवित्र महीना 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान चार सोमवार पड़ेंगे, जिसकी शुरुआत 3 अगस्त से हो रही है। इस पावन अवसर पर पटना जंक्शन स्थित प्रसिद्ध महावीर मंदिर में भक्तों के लिए चार शिवलिंगों पर रूद्राभिषेक कराने की विशेष व्यवस्था की गई है।

मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ और उनकी सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं, ताकि पूजा-अर्चना के दौरान किसी भी भक्त को असुविधा का सामना न करना पड़े।

मंदिर प्रशासन के अनुसार, चार में से तीन शिवलिंगों पर रूद्राभिषेक की प्रक्रिया सुबह 5 बजे से शुरू हो जाएगी। वहीं, महावीर जी के बगल में स्थित चौथे शिवलिंग पर रूद्राभिषेक का समय दोपहर 12 बजे से निर्धारित किया गया है। इस विशेष शिवलिंग पर भक्त सुबह 5 बजे से 10 बजे तक जल भी अर्पित कर सकेंगे। मंदिर के अंदर स्थित सभी चार शिव मंडपों को फूलों से भव्य रूप से सजाया जाएगा। साथ ही, भीषण गर्मी से राहत दिलाने के लिए सभी शिव मंडपों में एसी (वातानुकूलित) की सुविधा बहाल कर दी गई है।

श्री महावीर स्थान न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल ने बताया कि रूद्राभिषेक कराने वाले भक्तों की सहूलियत के लिए यह निर्देश दिया गया है कि उन्हें किसी भी प्रकार की पूजा सामग्री घर से लाने की आवश्यकता नहीं है। पूजा में उपयोग होने वाली सभी आवश्यक सामग्रियां मंदिर समिति की ओर से ही उपलब्ध कराई जाएंगी। भक्तों को केवल अपनी बुकिंग के निर्धारित समय पर मंदिर पहुंचना होगा, ताकि समयबद्ध तरीके से रूद्राभिषेक का अनुष्ठान संपन्न कराया जा सके।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, सावन का महीना भगवान शिव की आराधना और कृपा पाने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। स्कन्द पुराण से लेकर वायु पुराण तक में श्रावण मास की महिमा का गुणगान किया गया है। स्कन्द पुराण के अनुसार, सावन में काशी में रहकर शिव पूजा से मोक्ष मिलता है, तो वहीं शिवपुराण की विद्येश्वरसंहिता में इसे भगवान शिव का सर्वप्रिय महीना बताया गया है। इसके अलावा लिंग पुराण में इसे सौ यज्ञों के बराबर पुण्य देने वाला, तो वायु पुराण में नदी स्नान और शिव पूजन को मोक्षदायक माना गया है।

श्रीमद्भागवतम (द्वादश स्कन्द) में स्पष्ट किया गया है कि श्रावण मास में की गई उपासना का फल अन्य किसी महीने में मिलना संभव नहीं है। इन सभी पुराणों में यह संदेश निहित है कि इस पवित्र माह में भगवान शिव को अर्पित की गई जल की एक बूंद भी उन्हें अत्यंत प्रसन्न करती है। भक्त बेलपत्र, जल और दुग्ध अभिषेक के माध्यम से अपनी भक्ति प्रकट कर सकते हैं। मंदिर प्रबंधन ने सभी शिव भक्तों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी पूजा संपन्न करें।

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