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मई के तीसरे सप्ताह में थमेगा बिहार: सायरन बजते ही इन 6 जिलों में होगा पूर्ण 'ब्लैकआउट'

मई के तीसरे सप्ताह में थमेगा बिहार: सायरन बजते ही इन 6 जिलों में होगा पूर्ण 'ब्लैकआउट'

बिहार के पटना सहित 6 प्रमुख जिलों में मई के तीसरे सप्ताह में 'हवाई हमले' और 'ब्लैकआउट' का एक बड़ा मॉक ड्रिल आयोजित किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर होने वाले इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थितियों, जैसे युद्ध या हवाई हमले के समय नागरिक सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियों को परखना है।

नागरिक सुरक्षा निदेशालय को इस पूरे आयोजन की नोडल एजेंसी बनाया गया है।

इस मॉक ड्रिल के लिए बिहार के 6 संवेदनशील और महत्वपूर्ण जिलों का चयन किया गया है, जिनमें पटना, पूर्णिया, कटिहार, अररिया, बेगूसराय और किशनगंज शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह अभ्यास केवल शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित रहेगा और ग्रामीण इलाकों को इससे बाहर रखा गया है।

मॉकड्रिल की तैयारी को लेकर आज गुरुवार (30 अप्रैल, 2026) को आपदा प्रबंधन विभाग के सभागार में संबंधित जिलों के जिला पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षकों के साथ बैठक की गई। इसकी अध्यक्षता आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने की।वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई इस बैठक में चंद्रशेखर सिंह ने कहा कि नागरिक सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार के निर्देश के अनुसार वर्ष में कम से कम दो बार अर्द्धवार्षिक मॉकड्रिल का आयोजन किया जाना है। पिछले अभ्यास में पटना सहित दूसरे कई जिलों का उत्कृष्ट प्रदर्शन पाया गया था।

उन्होंने बताया कि तय योजना के अनुसार, निर्धारित दिन की शाम को 6:58 बजे पूरे शहर में एक साथ सायरन (हूटर) बजाए जाएंगे, जो लगातार 2 मिनट तक गूंजेंगे। ठीक 7:00 बजे पूरे शहर की बिजली काट दी जाएगी, जो अगले 10 मिनट यानी 7:10 बजे तक पूरी तरह बंद रहेगी। इस दौरान लोगों से घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की लाइटें बंद रखने की अपील की जाएगी। उन्होंने संबंधित जिलों में सायरन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए और कहा कि ब्लैकआउट में बिजली की भूमिक महत्वपूर्ण होती है इसलिए जिलों के पदाधिकारी समय रहते बिजली विभाग से सामंजस्य स्थापित करेंगे। सायरन के लिए चौक-चौराहों पर लगे साउंड सिस्टम, थानों और फायर ब्रिगेड की गाड़ियों का भी सहयोग लिया जा सकता है।

ब्लैकआउट के इन 10 मिनटों के दौरान सड़कों पर वाहनों का परिचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा और चालकों को अपनी हेडलाइट्स बंद कर वाहन किनारे खड़े करने होंगे। प्रशासन ने लोगों से इस दौरान इन्वर्टर चालू न करने और मोबाइल फोन का इस्तेमाल भी न करने की विशेष अपील की है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हवाई हमले जैसी स्थिति में दुश्मन को रोशनी के माध्यम से किसी भी महत्वपूर्ण केंद्र या घनी आबादी का पता न चले।

आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि इस अभ्यास में 'ड्रॉप एंड कवर' तकनीक और नजदीकी शेल्टर होम तक सुरक्षित पहुँचने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। मॉक ड्रिल में पुलिस, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग और नागरिक सुरक्षा की टीमें सक्रिय रहेंगी। लोगों को घबराहट से बचाने के लिए प्रशासन द्वारा पहले से ही व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा ताकि हर नागरिक इस राष्ट्रीय सुरक्षा अभ्यास का हिस्सा बन सके।

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