Dailyhunt
नगर निकायों में 'सशक्त स्थायी समिति' का गठन अब और पारदर्शी: वार्ड पार्षदों को मिला अपना नेता चुनने का हक! विजय सिन्हा का बड़ा ऐलान

नगर निकायों में 'सशक्त स्थायी समिति' का गठन अब और पारदर्शी: वार्ड पार्षदों को मिला अपना नेता चुनने का हक! विजय सिन्हा का बड़ा ऐलान

- बिहार के उपमुख्यमंत्री सह नगर विकास एवं आवास मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने नगर निकायों के कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। अब नगर निकायों में 'सशक्त स्थायी समिति' के सदस्यों का चयन मनोनयन के बजाय निर्वाचित वार्ड पार्षदों द्वारा गुप्त मतदान के जरिए किया जाएगा।

यह पूरी प्रक्रिया जिला पदाधिकारी (DM) के सीधे पर्यवेक्षण, निर्देशन और नियंत्रण में संपन्न होगी, ताकि किसी भी प्रकार के पक्षपात की गुंजाइश न रहे।

निर्वाचन प्रक्रिया के मुख्य बिंदु:

गुप्त मतदान और बहुमत: समिति के सदस्यों का चुनाव निर्वाचित वार्ड पार्षदों के गुप्त मतदान और बहुमत के आधार पर होगा।

DM की निगरानी: जिला पदाधिकारी चुनाव से कम से कम एक सप्ताह पहले सभी वार्ड पार्षदों को स्थान और समय की सूचना देंगे।

क्रमवार मतदान: प्रत्येक रिक्त पद के लिए अलग-अलग मतपेटिकाएं (क्रमांक 1, 2, 3 आदि) रखी जाएंगी। एक वार्ड पार्षद केवल एक ही रिक्ति के लिए नामांकन कर सकेगा।

तत्काल मतगणना: मतदान समाप्त होते ही पार्षदों के सामने मतपेटियां खोलकर गिनती की जाएगी और सर्वाधिक मत पाने वाले को विजयी घोषित किया जाएगा।

15 से 20 अप्रैल के बीच पूरा होगा निर्वाचन

डिप्टी सीएम ने बताया कि विभागीय अधिसूचना के अनुसार, प्रदेश के सभी जिलों के नगर निकायों में 15 अप्रैल 2026 से 20 अप्रैल 2026 के बीच सशक्त स्थायी समिति के निर्वाचन का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। चुनाव संपन्न होते ही नवनिर्वाचित सदस्यों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी।

वीडियोग्राफी और रिकॉर्ड का संधारण

पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन की पूरी कार्यवाही की वीडियोग्राफी कराई जाएगी। श्री सिन्हा ने स्पष्ट किया कि चुनाव से जुड़े सभी अभिलेख और वीडियो फुटेज अगले आम चुनाव तक या किसी न्यायिक प्रक्रिया के पूरा होने तक सुरक्षित रखे जाएंगे। DM को यह अधिकार दिया गया है कि वे चुनाव के लिए सहायक निर्वाचन पदाधिकारी और अन्य कर्मियों की प्रतिनियुक्ति कर सकें।

ऐतिहासिक संशोधन और उद्देश्य

विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि पूर्व में जारी अध्यादेश की अवधि समाप्त होने के बाद अब बिहार नगरपालिका (संशोधन) अधिनियम, 2026 के माध्यम से इसे स्थायी रूप से लागू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य नगर निकायों के निर्णय लेने वाली सबसे महत्वपूर्ण इकाई 'सशक्त स्थायी समिति' को अधिक लोकतांत्रिक और जवाबदेह बनाना है। इससे स्थानीय निकायों के विकास कार्यों में तेजी आएगी और पार्षदों की उचित भागीदारी सुनिश्चित होगी।

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: News4Nation