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Patna High Court: राबड़ी के भाई- पूर्व सांसद सुभाष यादव पर दर्ज केस खारिज, हाई कोर्ट नें SSP-डीएसपी-थानाध्यक्ष पर लगाया जुर्माना

Patna High Court: राबड़ी के भाई- पूर्व सांसद सुभाष यादव पर दर्ज केस खारिज, हाई कोर्ट नें SSP-डीएसपी-थानाध्यक्ष पर लगाया जुर्माना

टना हाइकोर्ट ने पूर्व सांसद सुभाष यादव को बड़ी राहत देते हुए बिहटा थाना में दर्ज प्राथमिकी को निरस्त कर दिया हैं।उन्होंने इस मामलें को रद्द करने के लिए याचिका दायर किया था। हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद वर्ष 2024 में ही सुभाष यादव के खिलाफ दर्ज कराए गए प्राथमिक को निरस्त कर दिया था।मामला सुप्रीम कोर्ट में गया और वहां से वापस पटना हाई कोर्ट में आया था।

हाईकोर्ट ने सुभाष यादव के खिलाफ बिहटा थाने में दर्ज पप्राथमिकी को निरस्त करते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों पर दस दस हजार रूपए का जुर्माना लगाया।

पटना हाइकोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया में भ्रामक तथ्यों के प्रस्तुतीकरण को काफी गंभीर माना। हाई कोर्ट ने इस मामलें का अंतिम निस्तारण करते हुए पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक समेत दानापुर के डी एस पी और बिहटा थाना के थानाध्यक्ष पर दस दस हजार रुपए का जुर्माना लगाया है । ये मामला बिहटा थाना कांड संख्या 425/2023 से संबंधित है।जस्टिस विवेक चौधरी ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के साले और पूर्व एम पी सुभाष यादव द्वारा दायर आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।

इसके पहले हाई कोर्ट ने 15 मार्च, 2024 को इस आपराधिक रिट याचिका को निष्पादित कर दिया था । हाई कोर्ट से इस आपराधिक रिट याचिका के निष्पादित हो जाने के बाद राज्य सरकार समेत सूचक ने सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर कर कहा था कि इस मामलें का निष्पादन उन्हें नोटिस दिए बिना कर दिया गया था। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पुनः सुनवाई के लिए पटना हाईकोर्ट वापस भेज दिया था ।पुनः सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मूल न्यायिक अभिलेखों का परीक्षण किया।

इस जांच में यह स्पष्ट हुआ कि 15 मार्च, 2024 की सुनवाई के दिन राज्य की ओर से अधिवक्ता हाई कोर्ट में उपस्थित थे तथा निजी प्रतिवादी भी पहले ही वकालतनामा दाखिल कर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके थे। कोर्ट ने यह भी माना कि आदेश में निजी प्रतिवादी के अधिवक्ता का नाम दर्ज नहीं होना केवल कार्यालय की लिपिकीय त्रुटि थी, इससे उनकी अनुपस्थिति साबित नहीं होती।सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह पाया कि सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष यह कहा गया कि बिना नोटिस दिए मामले का निष्पादित कर दिया गया था, जबकि न्यायिक अभिलेख इसके विपरीत थे।

सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि प्रतिवादी संख्या 3 से 5 द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष गलत तथ्य प्रस्तुत किए गए है। इसे न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला गंभीर मामला मानते हुए हाई कोर्ट ने इन तीनों पुलिस पदाधिकारियों पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।याचिकाकर्ता सुभाष प्रसाद यादव की ओर से अधिवक्ता मधुमय मधुप ने हाई कोर्ट को यह बताया कि पक्ष रखा कोर्ट के समक्ष आदेश-पत्र, उपस्थिति विवरण, वकालतनामा तथा अन्य अभिलेख प्रस्तुत कर बताया कि 15 मार्च ,2024 को हाई कोर्ट में हुई सुनवाई में राज्य सरकार के साथ साथ इस घटना के सूचक कोर्ट में उपस्थित थे।

बावजूद इसके इन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट तक को गुमराह किया है. इसी मामले को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट ने पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक समेत दानापुर के डी एस पी और बिहटा के थानाध्यक्ष पर दस दस हजार रुपए का जुर्माना लगाया ।सुभाष यादव ने यह आपराधिक रिट याचिका अपने खिलाफ बिहटा थाना में दर्ज प्राथमिकी को निरस्त करने के लिए दायर किया था। हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद वर्ष 2024 में ही सुभाष यादव के खिलाफ दर्ज कराए गए प्राथमिक को निरस्त कर दिया था।फिर ये मामला सुप्रीम कोर्ट में गया और वहां से पटना हाई कोर्ट में वापस आया।हाईकोर्ट ने सुभाष यादव के खिलाफ बिहटा थाने में दर्ज प्राथमिकी को निरस्त करते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों पर दस दस हजार रूपए का जुर्माना लगाया।

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