Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
सावन में सुल्तानगंज से ही क्यों भरा जाता है गंगाजल, जानिए अजगैबीनाथ की महिमा और बाबा बैद्यनाथ धाम से इसका दिव्य संबंध

सावन में सुल्तानगंज से ही क्यों भरा जाता है गंगाजल, जानिए अजगैबीनाथ की महिमा और बाबा बैद्यनाथ धाम से इसका दिव्य संबंध

गवान शिव की आराधना का सबसे पावन महीना सावन शुरू होते ही बिहार और झारखंड का धार्मिक वातावरण पूरी तरह शिवमय हो जाता है। भगवा वस्त्र धारण किए लाखों कांवरिये "बोल बम" और "हर-हर महादेव" के जयघोष के साथ सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर की ओर पैदल यात्रा पर निकल पड़ते हैं।

यह विश्व की सबसे बड़ी धार्मिक पदयात्राओं में से एक मानी जाती है। हर वर्ष देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होते हैं और लगभग 105 किलोमीटर की कठिन यात्रा पूरी कर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बाबा बैद्यनाथ धाम पर जलाभिषेक के लिए सबसे पवित्र गंगाजल केवल बिहार के भागलपुर जिले स्थित सुल्तानगंज से ही भरा जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजह यहां बहने वाली उत्तरवाहिनी गंगा है। सामान्यतः गंगा नदी दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर बहती है, लेकिन सुल्तानगंज में वह उत्तर दिशा की ओर प्रवाहित होती है। सनातन परंपरा में उत्तरवाहिनी गंगा को मोक्षदायिनी और अत्यंत शुभ माना गया है। यही कारण है कि श्रद्धालु यहीं से जल भरते हैं और संकल्प लेते हैं कि देवघर पहुंचने तक कांवर को जमीन पर नहीं रखेंगे।

सुल्तानगंज की धार्मिक पहचान केवल उत्तरवाहिनी गंगा तक सीमित नहीं है। यहां गंगा के बीच चट्टान पर स्थित अजगैबीनाथ महादेव मंदिर का विशेष महत्व है। मान्यता है कि यह मंदिर स्वयंभू शिवलिंग वाला प्राचीन तीर्थ है और इसका उल्लेख विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय निकले विष का पान करने के बाद भगवान शिव ने इसी स्थान पर विश्राम किया था। वहीं एक अन्य मान्यता के अनुसार, ऋषि जाह्नु से जुड़ी कथा के कारण इस क्षेत्र का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। सावन के दौरान लाखों कांवरिये गंगाजल भरने से पहले अजगैबीनाथ मंदिर में भगवान शिव का दर्शन कर यात्रा का शुभारंभ करते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां पूजा-अर्चना करने से यात्रा निर्विघ्न पूरी होती है और बाबा भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

सुल्तानगंज से झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम की दूरी लगभग 105 किलोमीटर है। श्रद्धालु नंगे पांव यह पूरी यात्रा करते हैं। रास्ते भर "बोल बम" के जयघोष, भजन-कीर्तन और सेवा शिविरों का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। धार्मिक मान्यता है कि सुल्तानगंज से लाए गए गंगाजल से बाबा बैद्यनाथ का अभिषेक करने पर भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। यही कारण है कि सावन के प्रत्येक सोमवार और पूरे महीने इस मार्ग पर आस्था का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ता है।

सावन में सुल्तानगंज, अजगैबीनाथ और बाबा बैद्यनाथ धाम का यह आध्यात्मिक संबंध केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सनातन आस्था, तप, संयम और भक्ति का अद्भुत संगम माना जाता है। यही वजह है कि हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालु इस पवित्र परंपरा का हिस्सा बनकर भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करने के लिए इस कठिन लेकिन दिव्य यात्रा पर निकलते हैं।

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: News4Nation