सीतापुर, उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के मामले में दोषी पिता को विशेष पॉक्सो अदालत ने मंगलवार को आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
पुलिस की प्रभावी पैरवी के चलते मुकदमा दर्ज होने के 114 दिनों के भीतर मामले में फैसला आया।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जारी प्रेस नोट के अनुसार, 17 मई 2026 को कमलापुर थाना क्षेत्र की रहने वाली महिला ने थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उसका पति मटोले अपनी 14 वर्षीय नाबालिग पुत्री को बुआ के घर से वापस लाते समय रास्ते में गन्ने के खेत के पास डरा-धमकाकर उसके साथ दुष्कर्म किया।
तहरीर के आधार पर कमलापुर थाने में पॉक्सो अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल वैज्ञानिक और फॉरेंसिक साक्ष्य एकत्र किए। घटनास्थल से अभियुक्त की शर्ट के टूटे बटन और बाल तथा पीड़िता के कपड़ों से प्राप्त जैविक नमूनों को विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) जांच के लिए भेजा गया।
पुलिस के अनुसार, एफएसएल रिपोर्ट और चिकित्सकीय साक्ष्यों से अभियोजन पक्ष को महत्वपूर्ण आधार मिला। पुलिस ने विवेचना पूरी करते हुए 10 दिन के भीतर, दो जून 2026 को न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल कर दिया। मंगलवार को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम एवं अपर सत्र न्यायाधीश, न्यायालय संख्या-14, सीतापुर ने मामले की सुनवाई के बाद अभियुक्त मटोले पुत्र छोटे, निवासी थाना कमलापुर को आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल ने मामले में प्रभावी विवेचना और अभियोजन की पैरवी के लिए विवेचना टीम तथा अभियोजन पक्ष की सराहना की।
