लंदन। पीओके के रावलकोट और अन्य जगह पाकिस्तानी सेना के हाथ प्रदर्शनकारियों के दमन का मसला अब अंतरराष्ट्रीय रंग ले चुका है। भारत ने जहां आम लोगों पर पाकिस्तान की सेना और पुलिस की ओर से फायरिंग की घटनाओं की निंदा की है।
वहीं, अब ब्रिटेन के 50 सांसदों ने अपने देश के विदेश सचिव को चिट्ठी लिखकर पीओके में हालात पर तुरंत ध्यान देने की मांग की है। ब्रिटेन के इन सांसदों ने चिट्ठी में लिखा है कि पीओके में पाकिस्तान सेना और पुलिस की फायरिंग से हो रही मौतें और घायलों की खबरें चिंता पैदा करती हैं।
ब्रिटेन में कश्मीर के मसले पर बनाए गए ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप (एपीपीजी) के अध्यक्ष इमरान हुसैन का कहना है कि सांसदों ने चिट्ठी में लिखा है कि ब्रिटेन में रहने वाले कश्मीरी परिवार पीओके में अपने रिश्तेदारों की सुरक्षा के बारे में गहरी चिंता में हैं। सांसदों ने ब्रिटेन की सरकार से अपील की है कि वो कूटनीतिक स्तर पर बातचीत को बढ़ावा दे। ताकि पीओके में हालात सामान्य हो सकें। पीओके के रावलकोट और कोटली में 27 जुलाई को हिंसा और फायरिंग की घटनाएं हुई थीं। पीओके की ज्वॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने दावा किया है कि पाकिस्तानी सेना और सुरक्षाबलों की फायरिंग में 19 लोगों की जान गई और कई घायल हुए।
पाकिस्तान सरकार ने 5 जून को जेएएसी को आतंकवाद निरोधक कानून के तहत प्रतिबंधित किया था। उसके बाद से विरोध-प्रदर्शन शुरू हुए थे। अब तक पीओके में 40 लोगों की जान गई है। इनमें 34 प्रदर्शनकारी हैं। जेएएसी ने कई मांगें रखी हैं। इनमें पीओके में पैदा होने वाली बिजली को स्थानीय लोगों को कम दर पर देना, आटा और जरूरी चीजों पर सब्सिडी, भोजन और दवा की आपूर्ति पर लगे प्रतिबंध तुरंत हटाना, पीओके विधानसभा में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीट खत्म करना। पाकिस्तान के हस्तक्षेप को बंद करना शामिल हैं। प्रशासनिक जवाबदेही की मांग भी की गई है। बता दें कि पीओके भारत के जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है। 1948 में पाकिस्तान ने सेना को कबायलियों के भेस में भेजकर इस इलाके पर अवैध कब्जा कर लिया था।

